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Sunday, August 27, 2017

श्री सूर्यकान्त गुप्ता के दोहा

श्री सूर्यकान्त गुप्ता के दोहा

 बेटी ला शिक्षा अउ सन्सकार दौ

बिन शिक्षा सँसकार के, जिनगी बिरथा जान।
मानुस तन हम पाय हन, बन के रहन सुजान।।

बेटा अउ बेटी घलो, शिक्षा के हकदार।
संस्कार के आज हे, दूनो ला दरकार।।

नर नारी बिन जगत के, रचना कइसे होय।
लानत बेटी कोंख मा , मनखे काबर रोय।।

दाई देवी मान के,  पूजौ पथरा चित्र।
घर मा ओकर प्रान के, काबर भूखे मित्र।।

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परियावरन बचाव

चीरत हौ का समझ के, मोरद्ध्वज के पूत।
काटे पेड़ जियाय बर, नइ आवय प्रभु दूत।।

रूख राइ काटौ मती, सोचौ पेड़ लगाय।
बिना पेड़ के जान लौ, जिनगी हे असहाय।।

बिन जंगल के हे मरें, पशु पक्षी तैं जान।
बाग बगइचा के बिना, होही मरे बिहान।।

आनन फानन मा सबो, कानन उजड़त जात।
करनी कुदरत ला तुँहर, एको नई सुहात।।

पीये बर पानी नही, कइसे फसल उगाँय।
बाढ़े गरमी घाम मा, मूड़ी कहाँ लुकाँय।।

जँउहर तीपन घाम के, परबत बरफ ढहाय।
परलय ओ केदार के, कउने सकय भुलाय।।

एती बर बाढ़त हवै, उद्यम अउ उद्योग।
धुँगिया धुर्रा मा घिरे, अनवासत हन रोग।।

खलिहावौ झन देस ला, जंगल झाड़ी काट।
सरग सही धरती हमर, परदूसन मत पाट।।

करौ परन तुम आज ले, रोजे पेड़ लगाव।
बिनती "सूरज" के हवै, परियावरन बचाव।।

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मनखे के तेवर

तेवर मनखे के चढ़ै, सम्हले ना सम्हलाय।
चिटिकुन गलती देख के, नानी याद कराय।।

भय भीतर माढ़े रथे, तभे उपजथे क्रोध।
जब अंतस मा झांकथे, होथे एकर बोध।।

बड़े बड़े विद्वान के, अलग अलग हे झुंड।
सुधा पान स्नान बर, जघा जघा हे कुंड।।

गुस्सा ले बढ़के कथें, करौ क्षमा के दान।
गलती बर जी डांट दौ, समझ तनिक नादान।।

जय जोहार......

सूर्यकांत गुप्ता
1009 सिंधिया नगर
दुर्ग (छ. ग.)

18 comments:

  1. बेटी अउ पर्यावरण बचाय के सुग्घर संदेश भैया

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  2. बेटी अउ पर्यावरण बचाय के सुग्घर संदेश भैया

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  3. सूर्यकान्त जी, लाजवाब दोहावली ।

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  4. सूरज भैया के प्रखर दोहावली
    इंखर उजाला ला दिया हा का कहि सकत हे ।
    सादर नमन भैया जी अनुपम सृजन बर

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  5. सुघ्घर दोहा सिरजन आदरणीय।।

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  6. सुघ्घर दोहा सिरजन आदरणीय।।

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  7. वाह्ह्ह्ह्ह् भइया बढ़िया संदेश परक दोहावली
    लेखनी ला सादर प्रणाम

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  8. सूर्यकांत भईया अतका बढ़िया दोहा पढ़ के मजा आगे मन अघागे 😊🙏💓🌹🌸🌻🌼🌺🌈🌅

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  9. सूर्यकांत भईया अतका बढ़िया दोहा पढ़ के मजा आगे मन अघागे 😊🙏💓🌹🌸🌻🌼🌺🌈🌅

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  10. मोर मयारुक भैया अउ गुरुदेव श्रद्धेय अरुण निगम जी ल सादर प्रणाम अउ सँगे सँग मोर बड़कू अउ नान्हें भाई बहिनी मन ल घलो प्रणाम/आशीर्वाद देत उँखर सुग्घर प्रतिक्रिया बर अंतस ले आभार प्रकट धन्यवाद देथौं....
    सादर

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  11. लाजवाब दोहावली भैयाजी।सादर बधाई

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  12. लाजवाब दोहावली भैयाजी।सादर बधाई

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  13. प्रेरणादायी दोहा मन बर सूर्या जी ला हार्दिक शुभकामना।

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  14. सुग्घर भावपूर्ण दोहावली हे , गुरुदेव गुप्ता जी। ।बधाई

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  15. आदरणीय सूर्यकांत भैया जी के लाजवाब दोहावली

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  16. जबरदस्त दोहावली भैया जी।

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