Tuesday, September 26, 2017

चौपैया छन्द - श्री हेमलाल साहू

चौपैया छन्द - श्री हेमलाल साहू
(1)
छोड़व मन माया, माटी काया, झन करहूँ अभिमाना।
चारे दिन जिनगी, सबला संगी, एक जगह हे जाना।।
संतोष रखै सुख, मिलै नहीँ दुख, अपन करम के भागे।
मन कतको जागे, कतको भागे, काल सबो ले आगे।।
(2)
तज जात पात ला, मान बात ला, आगू बड़ जा भाई।
सब संग जोर के, गाँव खोर के, रद्दा बने बनाई।।
आवौ सब पढ़बो, आगू बढ़बो, जिनगी सफल बनाबो।
सब गाँव म जाबो, अलख जगाबो, शिक्षा ला बगराबो।।

रचनाकार - श्री हेमलाल साहू
ग्राम - गिधवा (बेमेतरा) छत्तीसगढ़

11 comments:

  1. सुग्घर सिरजाय हव् हेम भाई।
    बधाई ।

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    1. सादर धन्यवाद दिलीप भैया

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  2. बहुत बढ़िया हेम भाई
    अइसने आधु बढ़त रहव

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    1. सादर धन्यवाद दीदी

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    1. सादर धन्यवाद मथुरा भैया

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  4. सुघ्घर चौपैया छंद!बधाई

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    1. सादर धन्यवाद वर्मा भैया

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  5. सुघ्घर चौपैया छंद!बधाई

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  6. बहुत बढ़िया हेम भाई

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    1. सादर धन्यवाद जीतेंन्द्र भैया

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