Wednesday, October 25, 2017

आल्हा छंद--श्री चोवा राम "बादल "5

आल्हा छंद--श्री चोवा राम "बादल "

पाँच तत्व के काया हावय,सुग्घर पाँचो देव बसाव।
आतम ज्ञान जगा के संगी, रोज रोज त्यौहार मनाव ।।

साफ़ सफाई गहना गुरिया ,दया मया के बर्तन लेय ।
धनतेरस बढ़िया हो जाथे,प्रभु धनवनतरि अमरित देय ।।

तन मन दूनों रथे निरोगी,तभे मँजा चउदस मा आय ।
खान पान मा संयम जेखर, चमकत मुखड़ा वो हर पाय ।।

छै बिकार अंतस मा बइठे,गरजत नरकासुर जी ताय ।
योग ध्यान मनमोहन पूजा, एखर बिन वो मर नइ पाय ।।

संग छोंड़ आलस बैरी के, मिहनत के नित अलख जगाय ।
माँ लछमी के करबो पूजा, आसा घी के दिया जलाय ।।

करे जतन जी गौ माता के,गोबर खातू ला अपनाय ।
गोवरधन के पूजा करबो,आवव सब झन पेंड़ लगाय ।।

मँहतारी के करके सेवा , माँतर जागे खुसी मँनाय ।
भाई दूज मनाबो सुग्घर,बहिनी मन के लाज बँचाय ।।

दोहा--
राम राज छाहित रहय, अवधपुरी सब गाँव ।
जय जय जय प्रभु राम के, परत हवँव मैं पाँव ।।

रचनाकार - श्री चोवा राम "बादल "
हथबन्ध, छत्तीसगढ़

22 comments:

  1. बधाई हो बादल भैया बहुत सुंदर

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  2. बहुत बढ़िया सर जी

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  3. बादल सर बहुत सुग्घर रचना।सादर बधाई

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    1. धन्यवाद ज्ञानु भाई जी।

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  4. बादल सर बहुत सुग्घर रचना।सादर बधाई

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  5. सुग्घर रचना बादल भैया।

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    1. सादर प्रणाम गुरुदेव।आपके प्रोत्साहन अब्बड़ सहारा बनथे।

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  7. सुग्घर आल्हा छंद भइया

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    1. सादर आभार मनी भाई।

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  8. चोवाराम भाई के आल्हा छंद पढ़ेव बहुत सुघ्घर लागिस बधाई हो बादल भाई

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  9. बहुत सुंदर आल्हा छंद में रचना भईया आप मन के बधाई हो

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    1. धन्यवाद अहिलेश्वर जी।

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  11. आल्हा अडबड अद्भुत हावय, अणिमा लघिमा गरिमा आय।

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    1. सादर प्रणाम दीदी। आपके आशीर्वाद पाके ए रचना सार्थक होंगे।

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