Friday, November 17, 2017

दोहा छंद – शकुन्तला शर्मा

दोहा छंद – शकुन्तला शर्मा 

छ्त्तीसगढ मा राम हें, सुन वो कर ननिहाल 
गाँव - कोसला नाव हे, बनिस राम के ढाल।

कौशल्या के मायके, भानु - मन्त के राज
भानुमंत दशरथ बनिन, समधी राज समाज।

महा - नदी के तीर मा, हावय शबरी - धाम
शबरी - बोइर चिखत हे, खावत हावय राम।

भेद - भाव के नार ला, बड सुंदर तिरियाय
गाँधी हर गुरुमान लिस, तेजस ओजस पाय।

सुरता - आथे दलित के, छंद - राग के दूत
देश - प्रेम के राग मा, बन गे खुद अवधूत।

छत्तीसगडही गीत ला, पागिस साव – खुमान
जगमगाय आकाश मा, गुरतुर - गान गुमान।

छ्त्तीसगढ - अभिमान ए, तीजन - बाई नाम
पँडवानी के गायिका, लौह नगर घर – धाम।

देव दास जब नाचथे, पहिरय - पिवँरा पाग
पंथी ला बगरा - दिहिस, दुनियाँ गावय राग।

मूर्ति बनाथे – बढिया, जग जाहिर अब नाव
नेल्सन के जस हे बडे, सुनव - सबो सहँराव।

रिखी खत्री बहुते गुनी, समझय सुर अउ ताल
छ्त्तीसगढ तुरही - बजा, बन - प्रदेश के ढाल।

नारायन जय - खंभ मा, ठाढे - हावय आज
सब्बो झन ला कहत हे, करव देश हित काज।   

रचनाकार - शकुन्तला शर्मा
भिलाई, छत्तीसगढ़

17 comments:

  1. बड़ सुघ्घर दोहावली,दीदी।
    सादर नमन

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  2. लाजवाब दोहावली दीदी।सादर बधाई

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  3. हे शारद मैया
    कोटिशः नमन

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  4. बेहतरीन दोहावली दीदी । सादर बधाई

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  5. बहुत सुग्घर दोहावली,दीदी।सादर प्रणाम।

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  6. प्रणम्य दीदी के सुग्घर दोहावली।

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  7. प्रणम्य दीदी के सुग्घर दोहावली।

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  8. वाह्ह्ह्ह्ह् दीदी सुग्घर दोहावली ,नमन्

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  9. भाई - बहिनी के मया, होथे - बड अनमोल
    सदा सुखी सब झन रहौ,मन से निकलय बोल।

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  10. नीक लगिस पढ़के बने,सुघ्घर दोहा तोर।
    बड़ ज्ञानी हावय हमर,दीदी शकुन ह मोर।।
    सुघ्घर दोहा दीदी के सत् सतू पाय लागु

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  11. वाह! दीदी सुग्घर दोहावली

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  12. अब्बड़ सुग्घर लागिस आदरणीया

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