Monday, November 6, 2017

कज्जल छन्द - श्री हेमलाल साहू

1)
वरुण देव हा जी रिसाय।
पानी आसो नइ गिराय।।
रोवत नदिया बहत जाय।
हाल देख भुइँया सुनाय।

रोवत हावे सब किसान।
आसो होइस नहीँ धान।
भुइँया जेकर हवै जान।
सुक्खा मा छूटत परान।

पानी के नइ पास धार।
सुन्ना हावय खेत खार।
रोवय बारी बइठ मरार।
पानी बिन नइ हवै नार।

जिनगी बर जी हवै काल।
सबके निकलत हवै खाल।
तीन साल परगे अकाल।
होवत नइ हे अंत राल।

जिनगी मा ला तँय बहाल।
वरुण देव करदे कमाल।
बारिश होय टरै दुकाल।
मन हरियर हो इही साल।

2)
जप ला करके राम राम।
छाँव रहय या बने घाम।
करले बढ़िया सँगी काम।
होयव जग मा तोर नाम।

जाँगर बढ़िया सँगी पेर।
जिनगी मा नइहे अँधेर।
पाबे सुख तँय बने फेर।
जिनगी बर तँय समे हेर।

होवय चर्चा गली खोर।
अपन मेहनत लगा जोर।
जस हा बाढ़त बने तोर।
पानी मा आलस ल बोर।

छोड़व मनके अंहकार।
दुरिहा होवय अंधकार।
दिया करम के बने बार।
आवय लछमी घर दुवार।

3)
सबो डहर हे लूट पाट।
बने रथें साहेब लाट।।
मानवता ला देत पाट।
खोल चोर सबके कपाट।।

मिलै न बिन सबूत चोर।
न्याय हवे  अंधरा मोर।।
घुमय चोर हा गली खोर।
कहाँ पुलिस ला हवै सोर।

करत परोसी हवै खोट।
जबले देखे हवै नोट।।
भाई  के मन होय छोट।
पइसा खातिर बिके वोट।।

गार पसीना करव काम।
अपन समे के हाथ थाम।
रही जगत मा तोर नाम।
पेरव जाँगर छाँव घाम।

आवव देवव जी सबो साथ।
काम बाँट सब अपन हाथ।।
सबो डहर गढ़ नवा गाथ।
धरती सेउक नवा माथ।।

रचनाकार -हेमलाल साहू
ग्राम-गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील नवागढ़, जिला बेमेतरा
(छत्तीसगढ़) मो. 9977831

9 comments:

  1. बहुत सुग्घर कज्जल छंद मा रचना सर।सादर बधाई

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  2. बड़ सुघ्घर कज्जल छंद सिरजाय हस भाई
    बहुत बहुत बधाई

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  3. गजब सुघ्घर हेम भाई

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  4. शानदार कज्जल छंद ,हेमलाल भैया।बधाई अउ शुभकामना।

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  5. कज्जल काजू कस लगय, मोला भाई हेम
    अक्कल माँगै शकुन हर,नहीं निभावय - नेम।

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  6. सुग्घर छन्द भइया वाह्ह्ह्ह्ह्

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