Sunday, February 25, 2018

सरसी छंद - श्री असकरन दास जोगी

*शंकर तान्डव*

शंकर तान्डव झुमरत नाचे,धरती दाई देख !
पटक-पटक के गोड़ दबाथे,छाती अपन सरेख !!1!!

चालै तिरछुल घेरी बेरी,डमरु ठोंक बजाय !
कामदेव तो रोवै दाई,कइसे जान बचाय !!2!!

मोह तीर के कारन जाते,संकर जोग रमाँय !
तीर मार के काबर भागे,अतनू आज डराय !!3!!

रती तको तो थरथर काँपे,सुनके संकर भाख !
तीसर आँखी उगले आगी,अतनू होगै राख !!4!!

तान्डव करके नटराज बने,महादेव भगवान !
येकर सेवा जेन करे जी,होवत हे गुनवान !!5!!

*गोदी*

गोदी खनथे हँकरत रामा,रोजी मजुरी ताय !
पानी डोंकत पोछे माथा,जाँगर भूँख मिटाय !!1!!

गैंती झउहाँ राँपा कुदरी,लाने घर ले रोज !
बड़का ढ़ेला कोड़त फेंके,मारे धरहा सोज !!2!!

बेंठ रोंठ हे अजिरन लागै,थथर-मथर हे हाल !
नापै गोदी फीता डारै,फेर खनै रे पाल !!3!!

माई पिल्ला जम्मे खनथें,पेट-पीठ ला देख !
बनी-भुती तो जिनगी बनगे,मेंट लिखे जी लेख !!4!!

राहत आये राहत नइहे,जाँगर टोरैं रोजे !
गरीबहा हा गरीबहा हे,दुनिया सुख के खोजे !!5!!

*रोटी*

रोटी राँधे बड़का दाई,खाबो दूध मँ बोर !
परसा पाना कसके तोपे,आगी बढ़िया जोर !!1!!

रोठ-मोठ तो रोटी हावै,अँगरा सेंकत नेत !
बबा बने हे देखत गोई,मन तो लाहो लेत !!2!!

नवा-नवा हे पत्तो लाने,पैरी बाजे लोर !
बेटा बइठे जोहत हावे,लाही रोटी टोर !!3!!

चटनी पीसत हावे दाई,माली मा धर लाय !
घर भर बइठें आसा बाँधे,चाँट-चाँट के खाँय !!4!!

सबके पेट भरे जी रोटी,लेत अँगाकर नाव !
कइथैं रोटी राजा जेला,बढ़िया नेक बनाव !!5!!

*बलात्कार*

बलात्कार ले होवत पीरा,सिहरत हंसा रोज !
माथा पटकत रोवै नारी,सतजुग खोजा खोज !!1!!

लाज हार तो टोरत हावै,कइसे पापी होत !
दारू-मंद के खेला खेले,मुँह में कालिख पोत !!2!!

कइसन भाग पाय रे नारी,रोथच चिहरत आज !
जाग तहूँ तो धरले लाठी,बनके गिरते गाज !!3!!

पापी आँखी घुरथे तोला,अली-गली मा देख !
फोरत जाते अइसन आँखी,काया अपन सरेख !!4!!

बलात्कार के दागी दागे,रोवत हिरदे मोर !
संविधान के धारा टोरें,साँठ-गाँठ ला जोर !!5!!

हमर आदिवासी के माटी,होगे बिरबिट लाल !
बस्तर बिगड़े कारन कोने,देखव  संगी हाल !!6!!

जाति बलात्कारी के बेर्रा,मान-धरम हे नास !
जिनगी ओकर महुरा होथे,जरथे बनके लास !!7!!

छत्तीसगढ़ तको तो कोसे,अपन भाग के रात !
देख राजधानी सो होथे,बलात्कार के घात !!8!!

*जीमी काँदा*

जीमी काँदा राँधे हावै,चलव चलीं जी खाय !
बबा डोकरा तोला हमला,सबला लेहे आय !!1!!

दही-महीं के अम्मठ भारी,पत्तो रोज सधाय !
सोसन भर तो खाही संगी,कतको सुँघत अघाय !!2!!

बढ़िया डबका डबके हावै,करछुल मात मँताय !
मिरचा हरदी धनिया मेथी,नून रगबग डराय !!3!!

गली-खोर तो कहरत हावै,उड़त बने हे सोर !
काकर घर में राँधे संगी,सुँघे नाक ला जोर !!4!!

रचनाकार : श्री असकरन दास जोगी
ग्राम-डोंड़की,तह.+पोस्ट-बिल्हा,जिला-बिलासपुर(छ.ग.)
www.antaskegoth.blogspot.com

23 comments:

  1. वाह जोगी जी अलग अलग विषय मा शानदार सरसी छ्न्द। क्या बात हे.....

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    1. बहुत बहुत धन्यवाद भईया जी

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  2. वाह जोगी जी अलग अलग विषय मा शानदार सरसी छ्न्द। क्या बात हे.....

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  3. बहुत बढिया लिखे हस, असकरण। सुग्हर रचना।

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    1. आपमन के अइसने मया मिलत रहै दीदी जी

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  4. बहुत बढ़िया जोगी जी

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    1. बहुत बहुत धन्यवाद सर जी

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    2. बहुत बहुत धन्यवाद सर जी

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  5. सुग्घर सरसी छंद बर आशकरन जोगी जी ला बहुत बहुत बधाई।

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    1. बहुत बहुत धन्यवाद भईया जी

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    2. बहुत बहुत धन्यवाद भईया जी

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  6. वाह वाह। शानदार सरसी छन्द भैया जी। बधाई अउ शुभकामना।

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    1. बहुत बहुत धन्यवाद भईया जी

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  7. गुरुदेव ल नमन 🌸🌼🌹🙏

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  8. गुरुदेव ल नमन 🌸🌼🌹🙏

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  9. वाह्ह्ह् असकरन भाई, सरसी छंद म बहुत सुग्घर रचना

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  10. बहुत बढ़ियासृजन हे आसकरण भाई

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  11. बहुत सुग्घर विविध विषय मा रचना सर।सादर बधाई

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  12. बहुत सुग्घर विविध विषय मा रचना सर।सादर बधाई

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  13. वाह्ह् सर जी शानदार सरसी बर बहुत बहुत बधाई।

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  14. बहुत बढ़ियाँ सरसी छंद भाई जी बधाई हो

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  15. बहुत बढ़ियाँ सरसी छंद भाई जी बधाई हो

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  16. वाह! वाह! बहुत सुग्घर हे
    आपके विचार सरसी छन्द सोहत हे।

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