Monday, April 16, 2018

लवंगलता सवैया--दिलीप कुमार वर्मा

1
बनारस के सब पान कहे,जिन खावत हे मुँह लाल करावय।
लगे चुनिया जब पान सखा,तब स्वाद तको अबड़े मन भावय।
बने जब ख़ैर ल डारत हे,ललियावत हे मुँह देखत हावय।
मिठावत हे मन भावत हे,सब लोगन पान बने तब खावय।1।

2
कटाकट चाबत मच्छर हा,जब मारत हौं झट ले उड़ियावय।
बड़ा बनथे उन सायर जी,नज़दीक म आवत गीत सुनावय।
रहे दिन रात सतावत हे,इखरो रहना हमला नइ भावय।
दया भगवान करौ अइसे,सब मच्छर हा पट ले मर जावय।2।

3
रहे सब के घर मच्छर हा,त गरीब अमीर तको नइ जानय।
मिले जस खून ल पीयत हे,उन जात बिजात कहाँ पहिचानय।
कहाँ उन देखत हे कुछ जी,गरवा तक ला अपने सब मानय।
इहाँ मनखे गदहा बन के,बस छूत अछूत रटे मुँह तानय।3।

4
अरे मनखे अब तो समझौ,मनखे बनके अपने पहिचानव।
जनावर जानत हे तब जी,मनखे अब तो मनखे सब मानव।
कहाँ तुम जात बिजात लड़े,मनखे सब एक हरे सब जानव।
करे जिन लोगन के करनी,उन लोगन के मुँड़ ला अब खानव।4।

5
लड़ावत हे हमला उन जी,अपने सब स्वारथ साधत हावय।
रहे हम हा जिन हालत मा,अउ हालत बत्तर गा कर जावय।
बटावत हे पइसा कवड़ी,हम हारत है उन राज ल पावय।
कहे अब मानव बात अरे,कतको करलौ उन हा नइ भावय।5।

6
दिवार बनावत हे मनखे,मनखे मनखे ल लड़ावत हावय।
बने सिधवा सब देखत हे,मरथे तब देख बड़ा सुख पावय।
लगे जब आग त डारत घीव नचावत लोग बड़ा हरसावय।
बतावत जात बिजात सबो,मनखे लड़ आपस मा मर जावय।6।

रचनाकार--दिलीप कुमार वर्मा
   बलौदा बाज़ार, छत्तीसगढ़

19 comments:

  1. उत्कृष्ठ लवंगलता सवैया सरजी।सादर बधाई

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    1. धन्यवाद ज्ञानु जी।

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  2. बहुत सुग्घर गुरूजी
    हार्दिक बधाई

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  3. बहुतेच सुग्हर सवैया लिखे हस दिलीप, बहुत बहुत बधाई।

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  4. आप के कलम के का वरणन करव दिलीप भैया। बहुत सुंदर रचना हे। मच्छर पान ला विसय बना के कतेक सुघर संदेश तक पहुंचे हव। गजब। आपके कलम अउ गुरुदेव ला नमन्।

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    1. बहुँत बहुँत धन्यवाद बलराम भइया।

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  5. वाह वर्मा जी बहुत सुन्दर लवंगलता सवैया

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  6. दिलीप भाई जी के सृजन मा विषय विविधता के भरमार रहिथे।
    बहुते सुघ्घर सवैया हे भाई जी
    बहुत बहुत बधाई

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  7. बनारस के पान, मच्छर के कटाई।
    मनखे मनखे के भेद , अउ लड़ाई।।
    गजब के वर्णन वर्मा जी,

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  8. बहुत सुघ्घर बधाई हो भईया जी

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  9. रंग रंग के विषय म जोरदार मनभावन सवैया

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  10. एक से बढ़के एक सवैया हे दिलीप जी।हार्दिक बधाई।

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  11. वाह वाह बेहतरीन लवंगलता सवैया मा रचना। आदरणीय वर्मा जी। सादर बधाई।

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