Sunday, April 8, 2018

अरविंद सवैया - श्री मनीराम साहू "मितान"

"बेटी"

(1)
झन मारव कोंख रखौ बिटिया जग लेवन देवव गा अँवतार।
अँगना तुँहरे जब आहयँ जी उँन देहयँ गा सब संकट टार।
कमती नइ होवयँ जी बिटिया अटके नइया करहीं  छिन पार।
लव खा किरिया ग करौ पिरिया मिलही तुँहला सुख हा भरमार ।

(2)
बनके  लछमी भरही घर जी बन शारद देहयँ गा सब ज्ञान।
इँदिरा प्रतिभा सुषमा जइसे करही उँन कारज पाहयँ मान।
डँटके  लड़हीं बइरी मन ले उँन भारत के अगराहयँ शान।
रहि जाहयँ जी सब नैन फटे बिटवा बनके उड़हीं धर यान।

(3)
ककरो जब राहय भाग बड़े जनमे बिटिया घर ओकर आय।
सब बेद पुरान म देव घलो महिमा इँकरे सब हें बड़ गाय।
महकावयँ जीवन के बगिया इँकरे चलते जग हे सुघराय।
कर केलवली ग मितान कहै करके  हइता झन लेवव हाय।

रचनाकार - श्री मनीराम साहू "मितान"
ग्राम - कचलोन (सिमगा) छत्तीसगढ़

9 comments:

  1. बहुत बढ़िया सुघ्घर रचना साहू जी बधाई हो

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  2. बहुत बढिया हे अरविंद सवैया हर, मनीराम। बहुत बहुत बधाई।

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  3. बहुत बढ़िया सृजन हे भाई

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  4. लाजवाब सरजी।सादर बधाई

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  5. लाजवाब सरजी।सादर बधाई

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  6. बहुत सुग्घर अउ लाजवाब अरविंद सवैयाभैया जी ।सादर बधाई।

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  7. बहुत बहुत बढ़िया भईया जी बधाई हो

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  8. बड़ सुग्घर अरविन्द सवैया के सृजन सर जी।सादर बधाई।

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  9. झन मारव खोंख मा,
    बहुत सुंदर अरविन्द सवैया गुरूजी

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