Monday, April 9, 2018

रोला छन्द - शकुन्तला शर्मा

(1)
भूख मरत हँव श्याम, कहाँ ले माखन खाबे
रोवत हावय गाय, शकुन कब गाय चराबे ?
ललचाए के बात, कहाँ अब माखन भइया
बछरू मर गे मोर, बचय कइसे अब गइया ?

(2)
बन के आ जा गोप, गाय ला बने चराबे
मुश्किल मा हे जान, प्राण ला तहीं बचाबे।
बछरू मन ला देख, पेट भर पसिया देबे
मन मा तैंहर ठान, मोर अरज़ी सुन लेबे।

(3)
नाचत हावय बंद, सबो देखय गिरधारी।
नावा लुगरा मोर, मारबे झन पिचकारी
हो झन जावय सोर, देख ले बिरज बिहारी।
होरी - गावय - छंद, तहूँ - सुन ले बनवारी।

(4)
होरी के हुड़दंग, नगाड़ा अड़बड़ बाजै
साँवर मोहन संग, राधिका गोरी साजै।
मन भर उडय पतंग,पवन धर उड़ै उड़ावै
हवा पिए हे भंग, गगन मा नाचय  गावै।

रचनाकार - शकुन्तला शर्मा
भिलाई, छत्तीसगढ़

17 comments:

  1. वाह्ह दीदी अब्बड़ सुग्घर गौ माता के पीरा ला बतावत
    अउ होली मा माते भगवान राधा कृष्णा के मया के सुग्घर वर्णन दीदी सादर प्रणाम

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  2. बधाई हो बहुत बढ़िया दीदी जी

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  3. बधाई हो बहुत बढ़िया दीदी जी

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  4. अन्तस् ले नमन दीदी।बहुतेच बढ़िया रोला,परोसे हव

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  5. बहुत सुघ्घर लिखे हस रोला छंद रोला छंद दीदी

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  6. दीदी आपमन के छंद सृजन तो जइसे
    ऋचा मन ही बोली बदल के आय हे लगथे।
    सादर नमन दी

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  7. वाहह्ह्ह्ह्हह् बहुँत सुग्घर भाव दीदी। पहिली रोला के अर्थ समझे बर थोरिक समय लगिस।बहुँत सुग्घर।
    प्रणाम।

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  8. वाह!दीदीबहुत सुग्घर रोला छंद

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  9. बहुत ही सुग्घर रोला छंद के सृजन करे हव दीदी। सादर बधाई। प्रणाम।

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  10. वाह्ह्ह वाहह दीदी बहुतेच सुन्दर रोला छंद सृजन।सादर नमन।

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  11. बहुत बढ़िया रचना दीदी। सादर प्रणाम

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  12. लाजवाब रचना दीदी

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  13. लाजवाब रचना दीदी

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  14. बहुत सुंदर रोला छंद दीदी
    जय श्री कृष्णा

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  15. बहुत सुंदर रोला छंद दीदी
    जय श्री कृष्णा

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  16. वाह वाह बहुतेच सुग्घर रोला सृजन करे हव दीदी जी।सादर नमन।

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  17. बहुत बढ़िया रचना दीदी जी
    बहुत बहुत बधाई हो

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