Wednesday, May 23, 2018

आल्हा छंद - श्री कन्हैया साहू अमित

24 मई जेठ दसमी वीर आल्हा जयंती -

*** *कथा प्रसंग* ***

हे गनेस तैं सबद बरन दे, सदा सहायक सारद माय।
हाँथ धरे हँव तुँहर लेखनी, अक्छर-अक्छर 'अमित' लिखाय।~1

जोंड़ जाँड़ के आखर-आखर, लिखय 'अमित' अँड़हा मतिमंद।
गुरु किरपा के बरसे बरसा, तभे लिखत हँव आल्हा छंद।~2

अब्बड़ अद्भुत अलखा आल्हा, अलहन अलकर टार मिटाय।
अटकर अजरा अलवा-जलवा, अड़हा अगियानी का बताय।~3

महाबीर बन जनमें आल्हा, बाहुबली ये 'अमित' कहाय।
जोश जवानी जउँहर जिनगी, सुन के कायर लड़ मर जाय~4

आल्हा ऊदल दू झन भाई, रहँय महोबा बीर महान।
गाँव-गाँव मा गाथैं गाथा, आल्हा ऊदल जस गुनगान।~5

धरमराज अवतारी आल्हा, भीम सहीं ऊदल दमदार।
लड़ें लडा़ई बावन ठन जी, जिनगी भर नइ जानिन हार।~6

कौरव पांड़व कुल हा जूझे, लड़गे कुरूक्षेत्र मैदान।
जनम धरें कलजुग मा दूनों, आल्हा ऊदल होंय महान।~7

जस गुन गावँव इन जोद्धा के, हमरे बस के नइहे बात।
जेखर कीरति घर-घर बगरे, जस गाथा गावँय दिन रात।~8

** *आल्हा के जनम* **

*जेठ महीना दसमी* जनमे, आल्हा देवल पूत कहाय।
बन जसराज ददा गा सेउक, गढ़ चँदेल के हुकुम बजाय।~9

ददा लड़त जब सरग सिधारे,आल्हा होगे एक अनाथ।
दाई  देवल परे  अकेल्ला, राजा रानी  देवँय  साथ।~10

तीन महीना पाछू जनमे, बाप जुद्ध में जान गवाँय।
बीर बड़े छुट भाई आल्हा, ऊधम ऊदल नाँव धराय।~11

राजा परमल पोसय पालय, रानी मलिना राखय संग।
राजमहल मा खेंलँय खावँय, आल्हा ऊदल रहँय मतंग।~12

सिक्छा-दीक्छा होवय सँघरा, लालन-पालन पूत समान।
बड़े बहादुर बलखर बनगे, लागँय राजा के संतान।~13

बड़े लड़इया आल्हा ऊदल, जेंखर बल के पार न पाय।
रक्छक बन परमाल देव के, आल्हा ऊदल जान लुटाय।~14

आल्हा संगी सिधवा मितवा, नइहे चोला एको दाग।
थरथर कापँय कपटी खोड़िल,बैरी बर बड़ बिखहर नाग।~15

बन चँदेल राजा के सेउक, अपन हँथेरी राखँय प्रान।
नित चँदेल हो चौगुन चाकर, दुनिया भर मा बाढ़य शान।~16

'अमित' महोबा के बलवंता, आल्हा आगू कोन सजोर।
बाढ़त नदियाँ पूरा पानी, पुन्नी कस चन्दा अंजोर।~17

झगरा माते बात-बात मा, मार काट अउ हाहाकार।
पोठ लहू के होरी होवय, पवन सहीं खड़कय तलवार।~18

काँही तो नइ भावय इनला, रास रंग अउ तीज तिहार।
फड़फड़ फरकय भक्कम भुजबल, रहँय जुद्ध बर बीर तियार।~19

सुते नींद नइ आवय दसना, बड़ बज्जर बलखर बलबीर।
लड़त-लड़त बीतय दिन रतिहा, दँय झट बैरी छाती चीर।~20

राजपाट राजा रज रक्छक, आल्हा नइ तो चिटिक अबेर।
कुकुर कोलिहा सौ का करहीं, आल्हा ऊदल बब्बर शेर।~21

सतरा बछर उमर मा होवय, आल्हा के शुभ लगन बिहाव।
नैनागढ़  नेपाली  राजा,  बेटी  मछला  संग  धराव।~22

राजकुमारी मछला जानय, जादू के जब्बर जर ग्यान।
नाँव सोनवा मछला जानव, रहय एक नइ इँखर समान।~23

बीर बहादुर बघवा बेटा, मछला आल्हा के संतान।
बाप कका कस बड़ बलवंता, इंदल बरवाना बलवान।~24

**आल्हा के पराक्रम**

राग रागिनी नइ तो भावय, राजमहल अब नइच सुहाय।
बोल बचन सुन महतारी के, बेटा बाघ मार घर लाय।~25

आज बाघ कल बैरी मारव, तब छतिया के दाह बुताय,
बिन अहीर के मैं नइ मानँव, दाई ताना इही सुनाय।~26

जेखर बेटा कायर निकले, महतारी रो-रो पछताय।
सुनव दुनों तुम आल्हा ऊदल, असल पूल जे बचन निभाय।~27

कुकुर बछर बारा बस जीयय, जीयय सोला साल सियार।
बरिस अठारा छत्री जीये, आगू के जिनगी धिक्कार।~28

मूँड़ टँगागे बाप कका के, माँडूगढ़ बर रुख के डार।
अधरतिया के अध बेरा मा, मूँड़ी बड़ पारय गोहार।~29

आवव आल्हा ऊदल आवव, मोर लड़ंका लठिया लाल।
बँच के आहू माँडूगढ़ मा, बन बघेल के जी के काल।~30

खूब लड़इया लहुआ आल्हा, दूसर ले देवी बरदान।
भगत भवानी सारद माँ के, जइसे सीया के हनुमान।~31

बइठ बछर बारा बन तपसी, मैहर माई के दरबार।
मूँड़ काट अरपन देवी ला, होय अमर आल्हा अवतार।~32

आल्हा ऊदल चलथें अइसे, जइसे रामलखन चलि जाय।
भुजबल भारी भक्कम भइगे, आँखी भभका कस भमकाय।~33

आल्हा ऊदल सिरतों सेउक, समझँय येला अपन सुभाग।
धरम करम हे राजपूत के, लड़त-लड़त दँय प्रान तियाग।~34

धरम धजा कस उड़े पताका, नाँव धराये हे अलहान।
सूरुज बूड़य बुड़ती बेरा, नइ बूड़े आल्हा के शान।~35

जीत-जीत के जिनगी जीयँय, जउँहर जोद्धा जय जयकार।
जेखर बैरी जीयँत जागय, ओखर जिनगी हा बेकार।~36

रन मा आल्हा करँय सवारी, पुष्यावत हाथी के नाँव,
खदबिद-खदबिद घोडा़ दउँड़े, कहाँ थोरको माढ़य पाँव।~37

देशराज बर खाये किरिया, आल्हा जोरय जम्मों जात।
एकमई सब राहव काहय, भेदभाव के छोड़व बात।~38

सबके हितवा आल्हा ऊदल, परहित मा ये भरँय हुँकार।
रक्छक बहिनी महतारी के, बैरी के कर दँय सरी उजार।~39

आल्हा ऊदल बड़ बलिदानी, राज महोबा के बिसवास।
करनी अइसन करें तियागी, अमर नाँव लिखगे इतिहास।~40

रचनाकार - श्री कन्हैया साहू "अमित"*
शिक्षक ~भाटापारा, छत्तीसगढ़
संपर्क ~ 9200252055

19 comments:

  1. सादर नमन गुरुदेव,आपके सिखोना ले लिखाय ये आल्हा छंद।

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  2. वाह अमित भाई,बड़ सुग्घर आल्हा रचे हच।बधाई।

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  3. बहुत बढ़िया आल्हा छंद
    बहुत बहुत बधाई

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  4. शब्द चयन अड़बड़ हे सुग्घर, पढ़त जोश तुरते बढ़ जाय।
    करे अमित जी सुग्घर सिरजन, आल्हा गाथा खूब बनाय। ।

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  5. बहुत बढ़िया आल्हा बर बधाई हो भईया जी

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  6. बहुत बढ़िया आल्हा बर बधाई हो भईया जी

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  7. पंदोली दे खातिर आप सबो के हिरदे ले अभार।

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  8. वाह वाह बेहतरीन आल्हा छंद हे भैया जी। सादर बधाई।

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  9. वाह्ह वाह अमित भइया कतका सुग्घर प्रसंग लेके आल्हा रचे हव भइया आपके लेखनी ला प्रणाम करत हव ।
    बहुत बहुत बधाई भइया

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  10. ऐतिहासिक प्रसंग मा शानदार आल्हा छन्द। अमित भाई ला हार्दिक बधाई।

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  11. बधाई अमित भाई

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  12. बधाई अमित भाई

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  13. वाह वाह,अद्भुत आल्हा चालीसा, सादर बधाई

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  14. अनुपम रचना सर

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  15. अनुपम रचना सर

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  16. एमा कुछ जगह टंकण त्रुटि दिखत हावय।

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  17. आप गुरु गयानी धियानी भैया संगी संगवारी मन ला पयलगी। अंतस ले अभार पंदोली दे खातिर।

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  18. अनुपम रचना सर हार्दिक बधाई।

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