Thursday, May 3, 2018

अमृतध्वनि छन्द - श्री रमेश कुमार सिंह चौहान

कटय बिमारी शुगर के, करू करेला राँध ।
रोटी भर खाना हवय, अपन पेट ला बाँध ।।
अपन पेट ला,  बाँध रखे हँव, लालच छोड़े ।
गुरतुर-गुरतुर, स्वाद चिखे बर, मुँह ला मोड़े ।।
लीम बेल अउ, तुलसी पत्ता, हे गुणकारी ।
रोज बिहनिया, दउड़े ले तो, कटय बिमारी ।।

रचनाकार - श्री रमेश कुमार सिंह चौहान 
मिश्रापारा,नवागढ़
जिला-बेमेतरा (छ.ग.)
मो.9976069545

14 comments:

  1. बहुत बढ़िया अमृत ध्वनि छंद हे भाई
    बिमारी हा टंकण त्रुटि मा बिमीरी होगे हे।
    संशोधन कर लेवव

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  2. हवै मोर बर लागू बढ़िया ए संदेसा
    रहै नियंत्रित पइधै झन जी अऊ कलेसा..
    भाई रमेश ल हिरदे ले बधाई जी...

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  3. बहुत बढ़िया बधाई हो भईया जी

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  4. बहुत बढ़िया बधाई हो भईया जी

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  5. बहुत बहुत बधाई रमेश, बहुत बढिया छंद के रचना करे हस।

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  6. बहुत सुघ्घर छंद लिखे हव रमेश भाई आप ल बहुत बहुत बधाई।

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  7. बहुत बढ़िया रचना बधाई हो

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  8. बहुत खूब सर जी

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  9. वाह्ह चौहान भइया बड़ सुग्घर सन्देश देवत छंद भइया बधाई हो

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  10. सुग्घर छंद भइया,

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  11. बहुत सुन्दर रचना सर

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  12. बहुत सुन्दर रचना सर

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  13. सुगर के बढ़िया इलाज चौहान जी

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  14. सुगर के बढ़िया इलाज चौहान जी

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