Sunday, May 6, 2018

हरिगीतिका छंद - श्री सुखदेव सिंह अहिलेश्वर "अँजोर"

"होही सदा फुरमान"

दाई ददा के पाँव छू,परगट खड़े सतनाम जी।
आशीष लेके जाय मा,होथे सफल सब काम जी।
सँउहे म चारो धाम हे,सँउहे गुरू के ज्ञान हे।
पबरित चरन परताप हे,मूरत बसे भगवान हे।

बेटा अपन माँ बाप के,करले बिनय करजोर गा।
खुश हो जही भगवान हा,बिगड़ी बनाही तोर गा।
खच्चित पहुँचिहौ ठाँव मा,अंतस धरौ बिसवाँस जी।
पाहौ सदा आशीष ला,जिनगी म जब तक साँस जी।

जाथस कहाँ गा छोड़ के,पुरखा पहर के गाँव ला।
पाबे कहाँ संसार मा,अइसन मया के ठाँव ला।
दाई ददा के संग हा,जिनगी म सुख के खान जी।
मूड़ी म रइही हाँथ ता,होही सदा फुरमान जी।

रचनाकर - श्री सुखदेव सिंह अहिलेश्वर "अँजोर"
              गोरखपुर,कवर्धा
               04/05/2017

14 comments:

  1. वाहःहः सुखदेव भाई
    सुघ्घर भाव अद्धभुत शब्द चयन
    उत्कृष्ट छंद सृजन
    बहुत बहुत बधाई

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  2. सादर आभार दीदी।प्रणाम।

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  3. बेहतरीन छंद लिखे हावस सुखदेव, तोला बहुत बहुत बधाई हे भाई!

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    1. सादर आभार दीदी।प्रणाम

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  4. झन भुलव माँ बाप ला, गजब

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  5. झन भुलव माँ बाप ला, गजब

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  6. अनुपम कृति सर

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  7. अनुपम कृति सर

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  8. बहुत बढ़िया भईया जी

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  9. सादर धन्यवाद जोगी सर जी

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  10. वाह वाह लाजवाब भैया

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