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Saturday, July 28, 2018

बरवै छंद - श्री मोहन कुमार निषाद

बेटी बेटा ला दव मान  -

बेटी बेटा हावय , एक समान ।
करही मिलके सेवा , तँय हर जान  ।1।

अधिकार बरोबर दे, होहय नाम ।
संग रही जीयत ले , आहय काम ।2।

बेटी जस बगराही , जगमा तोर ।
बेटी बनके लछमी , करही शोर ।3।

बेटी बिन सुन्ना हे , ये संसार ।
बेटी बेटा जिनगी , के आधार ।4।

भेदभाव झन करबे , तैंहर आज ।
बेटा बनके बेटी , करही राज ।5।

रचनाकार - श्री मोहन कुमार निषाद
   पता - लमती भाटापारा छत्तीसगढ़

10 comments:

  1. बहुतेच सुग्घर बरवै छंद मोहन भाई

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  2. बहुत बढ़िया है भाई

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  3. बहुत बढ़िया रचना
    गाड़ा गाड़ा बधाई हो निषाद जी

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  4. बहुत बहुत बधाई मोहन भाई

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  5. बहुत सुघ्घर संदेश भइया जी।

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