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Saturday, July 7, 2018

कुण्डलिया छंद - श्रीमती नीलम जायसवाल

 1-वीणापाणी

वीणापाणी दे मया, कर मोरो उद्धार।
मोला तँय हा ज्ञान दे, अतका कर उपकार।।
अतका कर उपकार, मोर तँय अवगुण हर ले।
दे विद्या के दान, अपन तँय सेवक कर ले।।
ओखर जग मा नाम, बसे तँय जेखर वाणी।
दाई आशा मोर, तहीं हस वीणापाणी।।

2-गुरु

गुरु के चरण पखार लव, मन ले देवव मान।
गुरु के किरपा ले बनय, मूरख हा गुणवान।।
मूरख हा गुणवान, चतुर अउ निर्मल बनथे।
जेखर पर गुरु हाथ, उही आकाश म तनथे।।
जइसे गरमी घाम, छाँव निक लागे तरु के।
वइसे शीतल होय, वचन हा हरदम गुरु के।।

3-मेहमान

जाए जब कोनो कहूँ, घर होथे  सुनसान।
कुरिया सब्बो हे भरे, आये हें मेहमान।।
आये हें मेहमान, भीड़ घर मा हय भारी।
हल्ला-गुल्ला गोठ, चलत हे दुनियादारी।।
अंतस हा सुख पाय, सबो झन के सकलाए।
मन भारी हो जाय, लहुट सब झन जब जाए।।

4-गरहन

गरहन लागिस चाँद ला, होगे ओहा लाल।
थोरिक बेरा ले रहिस, ओखर ऊपर काल।।
ओखर ऊपर काल, धरम मा अइसन कइथे।
 सूतक जब ले होय, सबो झन लाँघन रइथे।।
कइथे जी विज्ञान, नहीं मानव गा अलहन।
सब्बे करलव काम, रहय जब लागे गरहन।।

5-सँगवारी

सँगवारी के साथ मा, होगे कोरी साल।
सात जनम के साथ हे, रहिथन हम खुशहाल।।
रहिथन हम खुशहाल, जगत ले का करना हे।
दुख-सुख लेबो बाँट, सँग म जीना-मरना हे।।
चार-मुड़ा ममहाय, फुले जीवन फुलवारी।
जेखर नाम उपेन्द्र, उही मोरे सँगवारी ।।

6-मानसून

गरमी हा जावत हवय, आ गे हे बरसात।
जिउ मा ठंडक हे पड़े, मानसून के आत।।
मानसून के आत , सबो के मन हरसागे।
उमड़-घुमड़ के देख, अबड़-अक बादर आ गे।।
हरियर हो गे खेत, देख माटी के नरमी।
पड़ गे हे बौछार, लहुट जावत हे गरमी।।

रचनाकार- श्रीमती नीलम जायसवाल।
खुर्सीपार, भिलाई, जि. - दुर्ग, (छत्तीसगढ़)

22 comments:

  1. वाह! नीलम बहिनी सुग्घर कुंडलिया छंद

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  3. वाह! दीदी बहुत बढ़िया रचना हे बधाई 💐

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  4. बहुत सुघ्घर सृजन नीलम जी
    बहुत बहुत बधाई हो

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  5. बहुत सुघ्घर रचना हे

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  6. बहुत बढ़िया कुण्डलिया नीलम जी..।

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  7. बहुत बढ़िया कुण्डलिया छंद,,बधाई!!

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  8. बहुत बढ़िया कुण्डलिया छंद,,बधाई!!

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  9. बधाई हो नीलम बहिनी,सुग्घर कुण्डलिया छंद��

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  10. बहुत बढ़िया कुण्डलियाँ
    बहुत बहुत बधाई

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  11. बढ़िया रचना बर बधाई हो

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  12. बढ़िया रचना बर बधाई हो

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  13. सब्बो कुंडलियाँ लाज़वाब हे बहिनीईईई...
    हिरदे ले सादर बधाई.... मजा आगे पढ़के...

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  14. वाह वाह नीलम जी।शानदार कुण्डलिया छन्द।

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  15. वाह्ह दीदी अब्बड़ सुग्घर कुंडलिया छंद बधाई हो दीदी

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  16. अनुपम कृति दीदी

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  17. अनुपम कृति दीदी

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  18. वाहहह वाहह एक ले एक कुण्डलिया छंद।

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  19. बहुत बढ़िया कुण्डलिया
    बहुत बहुत बधाई - - - - !

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  20. आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद

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  21. आप सभी का हृदय से आभार

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