Monday, July 9, 2018

कज्जल छंद -श्री पुरूषोत्तम ठेठवार

जिनगी के दिन चार जान
काबर करे गरब गुमान
छोटे बड़खा हें समान
मनखे मनखे एक मान ।।1 ।।

जाति धरम अउ भेद भाव
तजँव सुमत के गीत गाव
अपन अपन बाँटा कमाव
नवा नवा रिसता बनाव ।।2 ।।

अनीति नरुवा मा चिभोर
जिनगी मा झन जहर घोर
काय मोर अउ काय तोर
मया भुलागे तोर सोर ।।3 ।।

आश साँस के ठेठवार
गिनती के हे तीन चार
राम नाम हे जग अधार
करही चोला राम पार ।।4 ।।

रचनाकार
पुरूषोत्तम ठेठवार
ग्राम -भेलवाँटिकरा
पोस्ट -उरदना
जिला - रायगढ
छत्तीसगढ़

36 comments:

  1. शानदार कज्जल छन्द।

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    1. सादर धन्यवाद
      प्रणाम

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  2. वाहहह वाहह सुन्दर कज्जल छंद।

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    1. धन्यवाद आदरणीय प्रणाम

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  3. बहुत बढ़िया कज्जल छंद ठेठवार जी,,,बधाई👌💐

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  4. बहुत बढ़िया कज्जल छंद ठेठवार जी,,,बधाई👌💐

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    1. धन्यवाद आदरणीय प्रणाम

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  6. सुग्घर भाव मा बढ़िया कज्जल छंद ठेठवार जी.।

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    1. सादर धन्यवाद सर जी

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  7. गज्जब बड़े भैया....
    बहुमुखी प्रतिभा के धनी हावस तें...
    सादर प्रणाम

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    1. सादर प्रणाम धन्यवाद

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  8. बधाई हो सर जी,कज्जल छंद मा समता के पाठ पढ़ाय हावव👌💐

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  9. बधाई हो सर जी,कज्जल छंद मा समता के पाठ पढ़ाय हावव👌💐

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    1. धन्यवाद आभार

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  10. बहुत सुग्घर छंद ठेठवार भइया

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    1. धन्यवाद भाई जी

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    2. धन्यवाद भाई जी

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  11. बड सुघ्घर रचना हे भाई

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    1. धन्यवाद भाई जी

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  12. बहुत सुग्घर सर

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  13. बहुत सुग्घर सर

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    1. धन्यवाद आदरणीय

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    1. धन्यवाद आदरणीय

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  15. बहुत बढ़िया कज्जल छंद

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    1. धन्यवाद दीदी

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  16. वाह्ह वाह वाह ठेठवार भइया अब्बड़ सुग्घर भावपूर्ण कज्जल छंद भइया

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    1. बहुतेच धन्यवाद भाई जी

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  17. बहुँत सुग्घर छंद ।बधाई।

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    1. धन्यवाद आदरणीय

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  18. Replies
    1. धन्यवाद आदरणीय

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