Wednesday, September 19, 2018

हरिगीतिका छंद - इंजी.गजानन्द पात्रे "सत्यबोध"

अभियंता दिवस- 15 सितम्बर 

अभियांत्रिकी,जनतांत्रिकी,गढ़थे सदा,इतिहास ला।
सुख से परे,सिरजन करे,सबके धरे,कुछ आस ला।
निर्माण जन,बलिहार मन,रखथे सँजो,विसवास ला।
खुद भूल के,श्रम तूल के,सहिथे सबो,जग त्रास ला।1।

बस लोह पथ,गज गामिनी,जल दामिनी,पुलिया बड़े।
बनगे सड़क,चल बेधड़क,अब आसमाँ,मनखे उड़े।
बनगे भवन,छुवथे गगन,अब देख लौ,दुनिया खड़े।
मिल साथ सब,कर बात अब,धर फोन ला,घर मा पड़े।2।

कब रात हे,कब हे सुबह,नइ तो समय,परिवार ला
घर के खुशी,पर के दुखी,तरसे सदा,इतवार ला।
पर देख लौ,अब सोंच लौ,समझौ अपन,अधिकार ला।
अफसर रहै,कुछ ना कहै,डरथे सदा,ठगदार ला।3।

छंदकार- इंजी.गजानन्द पात्रे *सत्यबोध*

12 comments:

  1. बहुत बहुत धन्यवाद गुरुदेव,

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  2. बहुत बढ़िया हरिगीतिका हे भाई
    आज के विज्ञान के

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  3. बहुत सुन्दर गुरुदेव

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  4. बहुत ही बढ़िया सिरजाय हव भैया, वाह्ह्ह्ह वाह्ह्ह्ह

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  5. शानदार रचना सर

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  6. शानदार रचना सर

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  7. शानदार सृजन करे हव भैया जी,सादर बधाई ।

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  8. वाहहह वाहह सत्यबोध सर।बहुत बढ़िया लगिस आपके रचना पढ़के।शानदार हरिगीतिका छंद के सृजन हे।

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  9. बहुत बढ़िया बधाई हो पात्रे जी

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