Sunday, January 27, 2019

गणतन्त्र दिवस विशेषांक : भाग - 2

जितेंद्र वर्मा खैर झिटिया:दोहा गीत

हमर तिंरगा

लहर लहर लहरात हे,हमर तिरंगा आज।
इही हमर बर जान ए,इही  हमर ए लाज।
हाँसत  हे  मुस्कात  हे,जंगल  झाड़ी देख।
नँदिया झरना गात हे,बदलत हावय लेख।
जब्बर  छाती  तान  के, हवे  वीर  तैनात।
संसो  कहाँ  सुबे   हवे, नइहे  संसो   रात।
महतारी के लाल सब,मगन करे मिल काज।
लहर------------------------------- आज।

उत्तर  दक्षिण देख ले,पूरब पश्चिम झाँक।
भारत भुँइया ए हरे,कम झन तैंहर आँक।
गावय गाथा ला पवन,सूरज सँग मा चाँद।
उगे सुमत  के  हे फसल,नइहे बइरी काँद।
का  का  मैं  बतियाँव गा,हवै सोनहा राज।
लहर------------------------------लाज।

तीन रंग के हे ध्वजा, हरा गाजरी स्वेत।
जय हो भारत भारती,नाम सबो हे लेत।
कोटि कोटि परनाम हे,सरग बरोबर देस।
रहिथे सब मनखे जुरे, भेदभाव ला लेस।
जनम  धरे  हौं मैं इहाँ,हावय मोला नाज।
लहर-----------------------------लाज।

जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"
बाल्को(कोरबा)
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द्वारिका प्रसाद लहरे : आल्हा छन्द ..

भारत माँ के बेटा..

भारत माँ के बेटा आवँव,वंदत हँव दूनो कर जोर।
ये माटी मा माथ नवावँव,चंदन हे भुइयाँ हा मोर।।1
वीर सिपाही मँय बलिदानी,खड़े हवँव मँय छाती तान।
बइरी मन ला मार भगाहूँ,ले लेहूँ बइरी के जान।।2
भारत माँ के मान बढ़ाहूँ, ये भुइयाँ के मँय रखवार।।
आँखी कोनों देखाही ता,धरे हवँव रे मँय हथियार।।3
बइरी बर लाठी बन जाहूँ,हितवा मन बर बनँव मितान।
दुख पीरा मा संग निभावँव,भारत माँ के गावँव गान।।4
भारत माँ ला सरग बनाहूँ,दया मया के बोहय धार।
भाई चारा सदा रहय जी,सबके करहूँ मँय उपकार।।5
सच्चा बेटा मँय हा बनके,भारत माँ के रखहूँ लाज।
ये माटी मा जनम धरे हँव,सेवा करके करिहँव साज।।6
रचनाकार
डी.पी.लहरे
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कन्हैया साहू "अमित"-कुंडलियाँ छन्द

01~
तिरंगा झंडा

धजा तिरंगा देश के, फहर-फहर फहराय।
तीन रंग के शान ले, बैरी घलो डराय।
बैरी घलो डराय, रहय कतको अभिमानी।
देबो अपन परान, निछावर हमर जवानी।
गुनव अमित के गोठ, कभू  झन आय अड़ंगा।
जनगण मन रखवार, अमर हो धजा तिरंगा।


02~भारत भुँइयाँ

भारत भुँइयाँ भारत हा हवय, सिरतों सरग समान।
सुमता के उगथे सुरुज, होथे नवा बिहान।
होथे नवा बिहान, फुलय सब भाखा बोली।
किसिम किसिम के जात, दिखँय जी एक्के टोली।
गुनव अमित के गोठ, कहाँ अइसन जुड़ छँइयाँ।
सबले सुग्घर देश, सरग कस भारत भुँइयाँ।

कन्हैया साहू "अमित"
भाटापारा~छत्तीसगढ़
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मीता अग्रवाल: कुंडलिया छंद
(1)
फहरे झंडा जी हमर ,हवय देश के शान।
जान अपन बाजी लगा,राखव ऐकर आन।।
राखव ऐकर आन,करव झन जी गुटबाजी।
सब बर एक समान,बँटे झन पंडित काजी।।
मनमुटाव ला छोड़, भाव हा ऊपर लहरे।
देश प्रेम के भाव,ऊँच झंडा बन फहरे।।

(2)
फहरे झंडा जी हमर ,हवय देश के शान।
जान अपन बाजी लगा,राखव ऐकर आन।।
राखव ऐकर आन,करव झन जी गुटबाजी।
सब बर एक समान,बँटे झन पंडित काजी।।
मनमुटाव ला छोड़, भाव हा ऊपर लहरे।
देश प्रेम के भाव,ऊँच झंडा बन फहरे।।

मीता अग्रवाल रायपुर छत्तीसगढ़
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कुलदीप सिन्हा: ताटंक - छंद

ये गणतंत्र परब ला भइया, जुरमिल सबो मनाबो जी।
ऊँच नीच के भेद भुलाके, सब ला गला लगाबो जी।।

ये तिहार हम सब बर संगी, सुख समृद्धि ला लाथे जी।
आज देश मा चारों कोती, झण्डा सब फहराथे जी।।

शान हरय गा इही तिरंगा, हम सब भारतवासी के।
ये हावे गा अतका पावन, जस जल गंगा कासी के।।

तंत्र हाथ मा हावे जन के, संविधान बतलाथे जी।
वोखर सेती तंत्र इहाँ के, प्रजातंत्र कहलाथे जी।।

हावे महान भारत भुइयाँ, कम कोनो झन आँको जी।
नइ पतियावव अगर कहूँ ते, चारों कोती झाँको जी।।

सबो ग्रन्थ हा गाये हावे, भारत माँ के गाथा ला।
करव तरक्की पढ़ लिख के सब, रोवव झन धर माथा ला।

कुलदीप सिन्हा "दीप"
ग्राम -- कुकरेल
तह . --- नगरी
जिला ---- धमतरी  ( छ . ग . )

Saturday, January 26, 2019

गणतन्त्र दिवस विशेषांक

दिलीप कुमार वर्मा: अरविंद सवैया

लहरावत हे बड़ ऊपर मा ध्वज,भारत माँ कर हावय शान। 
हम भारत के रहवासिन के,अटके रहिथे इह मा अब जान।
तन दे मन दे अउ जीवन दे,रखबो हम लाज ध्वजा कर मान। 
हम भारत वासिन के ध्वज हा, बनगे सुनले हमरो पहिचान।

रचना -दिलीप कुमार वर्मा
बलौदा बाज़ार छत्तीसगढ़ब
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गजानंद पात्रे: दोहा

आव मनाबो मिल सबो,आज  परब गणतंत्र।
आजादी  हमला  मिलिस ,गैर  फिरंगी  तंत्र।।

गाथा वीर  जवान के ,गाबो  मिल  सब  हिंद।
इँखर दिये बलिदान से,सोवत हन सुख नींद।।

संविधान  के  रचियता ,नमन  भीम  साहेब।
तोर  बदौलत  आज हे,कलम सबो के जेब।।

संविधान  सबला  बड़े, गीता  ग्रंथ  कुरान।
कंडिका  अनुच्छेद  हे , येकर  हिरदे  प्रान।।

रोटी  कपड़ा तन ढके,सबला  मिले मकान।
काम मिले हर हाथ ला,कहिगे भीम महान।।

नित  विकास भारत  गढ़े,जाति धर्म ले दूर।
सपना अब  अम्बेडकर, होवत  चकनाचूर।।

सत्ता के  बहरूपिया,खेलत  कइसन  खेल।
संविधान  के  मान ला,देवत  कहाँ  धकेल।।

छंदकार- इंजी.गजानंद पात्रे "सत्यबोध" 8889747888
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दिलीप कुमार वर्मा: गीत-चला तिरंगा फहराबो

चला तिरंगा फहरा देथन,आसमान मा शान से।
हम भारत वासी ला संगी,प्यारा लागय जान से।

येखर खातिर जान लुटादिन,भगत सिंग आजाद हा।
हिन्दू मुसलिम सिख्ख इसाई, जन जन के औलाद हा।
बड़ मुसकिल मा पाये हावन,आजादी ईमान से।
हम भारत वासी ला संगी,प्यारा लागय जान से।

सीमा के रखवारी खातिर,जाके डटे जवान हा।
जाड़ा गरमी अउ बरसा मा,फँसे सबो के जान हा।
करे कभू परवाह नही ओ,छाती ताने शान से।
हम भारत वासी ला संगी,प्यारा लागय जान से।

दिलीप कुमार वर्मा
बलौदा बाज़ार
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जितेंद्र वर्मा खैर झिटिया: अपन देस(शक्ति छंद)

पुजारी  बनौं मैं अपन देस के।
अहं जात भाँखा सबे लेस के।
करौं बंदना नित करौं आरती।
बसे मोर मन मा सदा भारती।

पसर मा धरे फूल अउ हार मा।
दरस बर खड़े मैं हवौं द्वार मा।
बँधाये  मया मीत डोरी  रहे।
सबो खूँट बगरे अँजोरी रहे।

बसे बस मया हा जिया भीतरी।
रहौं  तेल  बनके  दिया भीतरी।
इहाँ हे सबे झन अलग भेस के।
तभो  हे  घरो घर बिना बेंस के।

चुनर ला करौं रंग धानी सहीं।
सजाके बनावौं ग रानी सहीं।
किसानी करौं अउ सियानी करौं।
अपन  देस  ला  मैं गियानी करौं।

वतन बर मरौं अउ वतन ला गढ़ौ।
करत  मात  सेवा  सदा  मैं  बढ़ौ।
फिकर नइ करौं अपन क्लेस के।
वतन बर बनौं घोड़वा रेस के---।

जीतेन्द्र वर्मा "खैरझिटिया"
बाल्को(कोरबा)
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सुखदेव सिंह: चौपई छंद

गणतंत्र

का सोभा बरनँव सँहुराँव।
खुश हे शहर नगर अउ गाँव।
गली मोहल्ला पारा ठाँव।
धजा तिरंगा ला पहुँचाँव।

हे गणतंत्र दिवस त्यौहार।
मन गदगद हे झारा झार।
गुँजय तिरंगा के जय गान।
जय भारत जय हिन्दुस्तान।

सुग्घर संविधान के मंत्र।
जेखर ले चलथे सब तंत्र।
मानवता समता के यंत्र।
सबले बढ़िया हे गणतंत्र।

रोटी कपड़ा मान मकान।
शिक्षा रोजी पद पहिचान।
पूजा नियम धरम अउ दान।
सब बर अवसर एक समान।

शोषित वंचित जात समाज।
आरक्षण पावत हे आज।
कोठी मा अब हवय अनाज।
फुलत फरत हे लोक सुराज।

बोली भाषा भले अनेक।
पर सबके अंतस हे एक।
सद् विचार सबके हे नेक।
अब हे मनखे मनखे एक।

जनता होगे हे हुशियार।
रेंगय रस्ता ला चतवार।
देखय बिगड़े के आसार।
लेवय अपने हाथ सँवार।

ना लाठी तब्बल तलवार।
ना सैना ना सिपहसलार।
जनमत बर नइ हे तकरार।
जनता अब चुनथे सरकार।

बाबा भीमराव गुणवान।
तुँहर कलम के लिखे विधान।
हवय हमर बर जीव परान।
मन के सुख मुँह के मुस्कान।

रचनाकार-सुखदेव सिंह अहिलेश्वर
मु.गोरखपुर,कबीरधाम(छत्तीसगढ़)
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 पोखनलाल जायसवाल -  सार छंद : गणतंत्र दिवस

तीन रंग के हमर तिरंगा , फहर फहर फहरावय ।
आन बान अउ शान जान के , भारत भर ला भावय ।।

बीर भगत बिस्मिल मन हा , हावय बड़ बलिदानी ।
अशफाक संग शेखर कुदगे , दे दिन अपन जवानी ।।

बीर बहादुर नेता दिस , लहू माँग आजादी ।
खूब लड़िस बैरी मन से , पा छाती फौलादी ।।

बचय चिन्हारी बलिदानी के , हावय जिम्मेदारी ।
हवय कीमती आजादी हा मानन सब सँगवारी ।।

*पोखन लाल जायसवाल*
ग्राम - पठारीडीह , तहसील - पलारी
जिला - बलौदाबाजार छग
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चोवाराम वर्मा: तिरंगा झंडा के जय।(सार छंद)
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अमर रहै गणतंत्र परब हा, आँच कभू झन आवय।
नील गगन मा फहर तिरंगा, लहर लहर लहरावय ।

दुनिया भर मा चमचम चमकय, देश हमर ध्रुव तारा।
दसों दिशा मा गूँजत राहय, पावन जय के नारा ।

शेखर बिसमिल बोस बहादुर, जेकर परम पुजारी ।
जे झंडा ला प्रान समझथन, भारत के नर नारी।

थाम तिरंगा लड़ गोरा लें,  दे हाबयँ कुरबानी।
जेला देख शत्रु डर्राकें, रन मा मागैं पानी।

बापू वल्लभ नेहरू इंदिरा, गुन गाइन सँगवारी।
गावत राहय महिमा जेकर, कविवर अटल बिहारी ।

देव हिमालय मुँड़ी उठाके, जेकर महिमा गाथे ।
उही धजा के बंदन करके, "बादल" माथ नवाथे ।


    चोवा राम "बादल"

Monday, January 21, 2019

छेरछेरा पुन्नी विशेषांक

रूपमाला छंद-श्री सुखदेव सिंह अहिलेश्वर

छेरछेरा

पूस के पुन्नी म आथे पावनी त्यौहार।
लोग श्रद्धा ले नहाथें जा नदी के धार।
अन्न के सब दान लेथें अन्न करथें दान।
छेरछेरा के परब हे राज के अभिमान।

छेरछेरा के कथा के सार हावय एक।
लूट अपरिद्धापना के राह नोहय नेक।
दान परमारथ हरय सत धर्म के पहिचान।
अन्न धन शिक्षा सबो बर हो इही मन ठान।

रचनाकार-सुखदेव सिंह अहिलेश्वर
मु.गोरखपुर,कबीरधाम(छत्तीसगढ़)

कुंडलिया छन्द -

🌺🌷अमित के कुण्डलियाँ🌷🌺

01~*फेरा डारँय खोर के, जुरमिल सब्बो मीत।*
*संगी सब सकलाय के, गुरतुर गावँय गीत।*
*गुरतुर गावँय गीत, मया के बोलँय बोली।*
*झोला टुकनी हाँथ, चलय गदबिद सब टोली।*
*कहे अमित कविराज, दान पुन छेरिक छेरा।*
*चिहुर करँय जी पोठ, लगावँय घर-घर फेरा।*

02~*बेरा पुन्नी पूस के, नँदिया मा असनान।*
*मुठा पसर ठोम्हा अपन , करव उचित के दान।*
*करव उचित के दान, मरम ला एखर जानव।*
*मिलथे ये परलोक, बात ला सिरतों मानव।*
*कहय अमित कविराज, गुनव जी छेरिक छेरा।*
*छोड़व गरब गुमान, आज हे पबरित बेरा।*

छन्दकार - कन्हैया साहू "अमित"
भाटापारा~छत्तीसगढ़

दोहा - बोधनराम निषादराज

अन्न  कूट के  बार हे, छेरिक  छेरा छेर।
आवौ दाई दान दव,कोठी धान ल हेर।।

सार छन्द - जितेंद्र वर्मा खैर झिटिया:

"छेरछेरा"

दान अन्न धन के कर लौ सब,सुनके छेरिक छेरा।
जतके  देहू  ततके बढ़ही,धन  दउलत शुभ बेरा।

पूस पाख मा पुन्नी के दिन,बगरे नवा अँजोरी।
परब  छेरछेरा  हा  आँटे,मया पिरित के डोरी।
धिनक धिनक धिन ढोलक बाजे,डंडा ताल सुनाये।
लइका  लोग  सियान  सबो मिल,नाचे  गाना  गाये।
थपड़ी कुहकी झाँझ मँजीरा,सुन छूटय दुख घेरा।
दान अन्न धन के कर लौ सब,सुनके छेरिक छेरा।

दया  मया  सागर  लहरावै,नाचे जीवन नैया।
गोंदा गमकत हे अँगना मा,मन भावै पुरवैया।
जोरा करके जाड़ ह जाये,माँघ नेवता पाये।
बर पीपर हा पात गिराये,आमा हा मँउराये।
सेमी  गोभी  भाजी  निकले , झूले  मुनगा   केरा।
दान अन्न धन के कर लौ सब,सुनके छेरिक छेरा।

माँग  जिया मा मया घोर अउ,दान देव बन दाता।
भरे अन्न धन मा कोठी ला,सब दिन धरती माता।
राँध  कलेवा  खाव बाँट के,रिता रहे झन थारी।
झारव इरसा द्वेष बैर ला,टारव मिल अँधियारी।
सइमों  सइमों  करे  खोर  हा,सइमों  सइमों डेरा।
दान अन्न धन के कर लौ सब,सुनके छेरिक छेरा।

जीतेंद्र वर्मा"खैरझिटिया"
बाल्को(कोरबा)


आल्हा छंद- इंजी. गजानन्द पात्रे "सत्यबोध"

आव  सुनावँव  तुँहला  संगी,परब  छेर  छेरा  के  मान।
दया  दान अउ  प्रीत  भरे  हे,माई  कोठी  के  जी धान।।

पूस महीना  पाख अँजोरी,नवा सुरुज  के नवा अँजोर।
धान  कटोरी  महतारी  हा, देख  रखे  हे  मया  सजोर।।

गाँव शहर अउ गली गली मा,होगे देखव नवा  बिहान।
चारो  कोती  गूँजत  हावय ,हमर  छेर   छेरा  के  गान।।

मया दुवारी खुल्ला रखके,सब झन करिहौ सुघ्घर दान।
दया बिराजे  मन मा  सबके,हे प्रभु जग ला  दे वरदान।।

रचना- इंजी.गजानंद पात्रे "सत्यबोध" बिलासपुर (छ. ग.)