Monday, October 7, 2019

अमृतध्वनि छंद-शोभामोहन श्रीवास्तव



अमृतध्वनि छंद-शोभामोहन श्रीवास्तव

1/
कंकर कंकर मा बसे, भूतनाथ भगवान ।
शंकर शंकर जे कहे, तरे जगत ले जान ।।
तरे जगत ले, जान उही नर, जपले हर हर ।
जटा गंगधर ,लपटाये गर, डोमी बिखहर ।
चंदा सिर पर,राख देंह भर,चुपरे शंकर।
हर दुःख जर, शिवमय सुंदर,कंकर कंकर।।

2/
भोले शंकर के नरी ,सोहत सर्पन माल ।
कनिहा छाला बाघ के,दिखत गजब बिकराल।।
दिखत गजब बिक-राल रूप हर ,लागत हे डर।
काँपत थरथर,तीन लोक भर , राज करे हर ।
सरसर सरसर, साँप देंह पर, चलत भयंकर।
 झरथे झरझर,गंग जटा हर, भोले शंकर ।।

3/
डमडम डम कर  नाचथे,डमरूधर कैलाश।
झनके ततका दूर के, होथे दुख के नाश।।
होथे दुख के, नाश भूत धर, परबत ऊपर।
बइठे शंकर,पदवी अम्मर, देवय किंकर।।
जोगनिया हर,लठर झुमर कर,नाचे मन भर।
चिहुर भयंकर,हरहर हरहर,डमडम डमकर ।

4/
जय जय काली मातु कहि, सुमिरँव बारम्बार।
पाँव परँव डंडासरन, ड़ोगा कर दे पार ।।
ड़ोगा कर दे ,पार निराली, तँय बलशाली।
ओली रीता,भर दे मैया, तँही उदाली।। 
जय कंकाली,आँखी लाली,काल कराली।
जग उजियाली,मनगति चाली,जय जय काली।।

छंदकार-शोभामोहन श्रीवास्तव
पता-रायपुर अमलेश्वर छत्तीसगढ़

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