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Thursday, August 15, 2019





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कुकुभ छंद - विरेन्द्र कुमार साहू , राजिम

हाथ तिरंगा झंडा प्यारा , मुँह जय भारत के नारा।
आय जवानी बहगे कतनो , देश प्रेम पबरित धारा।।

माटी ला तरवा चटका के , पीके गंगा के पानी।
अंग्रेजन ले लोहा ले बर , जूझिन कतनो बलिदानी।।

नइ छोड़िन हे अपन धरम ला ,तन के करदिन कुर्बानी।
हाँसत हाँसत चढ़गे फाँसी , जब्बर बीर स्वाभिमानी।।

झूमिन नाचिन देश प्रेम मा , करिन मौत सँग मा शादी।
उखरे तन के सिढ़िया चढ़के , आये हाबे आजादी।।

छंदकार:- विरेन्द्र कुमार साहू , ग्राम बोड़राबाँधा (पाण्डुका) , वि.स. राजिम जि. गरियाबंद , छ.ग.
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दोहा छन्द - बोधन राम निषादराज

धजा  तिरंगा  मान हे, पुरखा  के पहिचान।
लाज बचाना हे धरम,कमर कसौ जी जान।।

आवौ  भाई आव जी, बइरी  ला भगवाव।
आँख उठा के देखथे,वोला सबक सिखाव।।

भारत के खातिर सबो,मर मिट जाबो संग।
उड़न नहीं  देवन हमन, आज तिरंगा रंग।।

लहर-लहर लहराव जी, झंडा  उड़े अगास।
खुशियाँ सबो मनाव जी,बइठौ नहीं उदास।।

इही  तिरंगा  ले हवै,  हमर देश के  मान।
बइरी मन काँपत रथे, अइसन हिंदुस्तान।।

केसरिया पहिचान हे,तप अउ त्याग समान।
एखर  ले हे  देश अब, सर्व  सुरक्षा मान।।

भाई-चारा  शांति के,  सादा रंग महान।
समे बतावत चक्र हे, नीला  गोल निशान।।

हरियर  भुइँया खार  हे, पर्यावरण सुधार।
रंग  तिरंगा  देश के, करलौ  जय जोहार।।

छंदकार - बोधन राम निषादराज
सहसपुर लोहारा,जिला-कबीरधाम(छत्तीसगढ़)
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सार छन्द - गुमान प्रसाद साहू

आजादी के परब आज हे, जुरमिल सबो मनावव।
जय बोलव भारत माता के, राष्ट्र गान ला गावव।।

बड़ मुश्किल मा मिले हवै जी, सब ला ये आजादी।
अउ होवन झन देहू संगी, अइसन जी बरबादी।।

हरय तिरंगा शान देश के, लहर लहर लहरावव।
आजादी के परब आज हे, जुरमिल सबो मनावव।।

मनखे मनखे एके हावय, भेद कभू झन जानौ।
जात पात के पाटव डबरा, धरम देश ला मानौ।।

भेद मिटालव ऊँच नीच के, सुमता डोर बँधावव।
आजादी के परब आज हे, जुरमिल सबो मनावव।।

छंदकार - गुमान प्रसाद साहू
ग्राम- समोदा (महानदी),रायपुर, छत्तीसगढ़
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कुण्डलिया छंद - मीता अग्रवाल
(1)
भारत देश बड़े हवे,विश्व गुरू पहिचान।
लोकतंत्र सब ले बड़े, सोन चिरैया मान।
सोन चिरैया मान,बहे पावन जल गंगा।
जनगण मन हे गान,गाव ले हाथ तिरंगा।
सुन मीता के गोंठ,आन हे बड़का दौलत।
हवे शान कश्मीर, तिरंगा लहरे भारत।।
(2)
आजादी के मोल बर,होय लाल कुर्बान।
अंग्रेज़न के राज मा,हिन्दी के अपमान।
हिन्दी के अपमान, रहिस अंग्रेजी चंगा।
होय वीर बलिदान, धरे हर हाथ तिरंगा।
सुन मीता के गोंठ,लड़े जागे आबादी।
छेड़ देश बर तान,पाय मुश्किल आजादी।।

छंदकार-डाॅ मीता अग्रवाल
पुरानी बस्ती ,लोहार चौंक, रायपुर छत्तीसगढ़
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सार छन्द - कमलेश कुमार वर्मा

भारत माँ के रक्षा खातिर,गवाँ अपन जिनगानी।
जुग-जुग बर अम्मर हो जाथे,सबो वीर बलिदानी।।

जंगल पर्वत बरसा गर्रा,झेल सबो परशानी।
छूट अपन माटी के करजा, करथे  सफल जवानी ।।

इँकर वीरता ले हो जाथे, बैरी पानी-पानी।
ठोंक अपन छाती ला रन मा, याद दिलाथे नानी।।

आखिर दम तक गावत रइथे,जय भारत  के बानी।
सदा तिरंगा हा ही बनथे, सैनिक कफ़न निशानी।।

सींच लहू ले ये भुइँया ला,लिखथे त्याग कहानी।
गाड़ा-गाड़ा वंदन कर लव,सुरता कर कुर्बानी।।

छंदकार:कमलेश कुमार वर्मा
शिक्षक, भिम्भौरी,बेरला, जिला-बेमेतरा(छ. ग)
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कुण्डलियाँ छन्द - कन्हैया साहू अमित
(1)
धजा तिरंगा देश के, फहर-फहर फहराय।
तीन रंग के शान ले, बैरी घलो डराय।
बैरी घलो डराय, रहय कतको अभिमानी।
देबो अपन परान, निछावर हमर जवानी।
गुनव अमित के गोठ, कभू  झन आय अड़ंगा।
जनगण मन रखवार, अमर हो धजा तिरंगा।
(2)
छतरंगा संस्कृति इहाँ, आनी-बानी भेस।
अनेकता मा एकता, हावय भारत देस।
हावय भारत देश, मिलय दाई कस ममता।
अलग धरम अउ जात, तभो ले दिखथे सुमता।
कहय अमित हा आज, सुमत मा रहिथें चंगा।
सुग्घर तीज तिहार, इहाँ संस्कृति छतरंगा।
(3)
धजा तिरंगा देख के, बैरी हा थर्राय।
संग हवा के ऊँच मा, लहर-लहर लहराय।
लहर-लहर लहराय, गजब झंडा हा फर-फर।
काँपय कपसै ठाढ, देख के बैरी थर-थर।
कहय अमित हा आज, इहाँ रक्छक बजरंगा।
अड़बड़ फभित अगास, हमर हे धजा तिरंगा।
(4)
बनँव पतंगा देश बर, अपने प्रान गवाँव।
धरँव जनम जे बेर मैं, भारत भुँइयाँ पाँव।
भारत भुँइयाँ पाँव, देश के बनँव पुजारी।
नाँव-गाँव सम्मान, इँहे ले हे चिन्हारी।
सिधवा झन तैं जान, बैर मा हरँव भुजंगा।
कहय अमित सिरतोन, देश बर बनँव पतंगा।

छन्दकार - कन्हैया साहू 'अमित'
भाटापारा छत्तीसगढ़
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ताटंक छन्द - जगदीश "हीरा" साहू

अपन देश के रक्षा खातिर, प्रण कर मर मिट जाना हे।
आँखी जेन दिखाही हमला, सबके मजा चखाना हे।।

नइ डर्रावन हम तो भाई, अब धमकी अउ गोली ले।
पटक-पटक के मारव सबला, खींचव भीतर खोली ले।।

कूटी-कूटी कर देवव अतका, गिन-गिन सब थक जावै जी।
काँप जवय सब पुरखा थर-थर, जिनगी भर पछतावै जी।।

हमर मया ला देखे अब तक, अब नफरत दिखलाबो जी।
ये दुनिया के नक्शा ले हम, पाकिस्तान मिटाबो जी।।

कासमीर ला माँगत हावय, अब राँची ला लूटौ जी।
बनके बघवा भारत माँ के, बैरी ऊपर टूटौ जी।।

करजा तभे छुटाही सबके, तिरंगा लहराना हे।
राष्ट्रगान भारत के मिलके, पाकिस्तान म गाना हे।।

छन्दकार - जगदीश "हीरा" साहू
कड़ार (भाटापारा) छत्तीसगढ़
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सार छंद - महेन्द्र देवांगन माटी

देश हमर हे सबले प्यारा , येकर मान बढ़ाबो ।
कभू झुकन नइ देन तिरंगा , झंडा ला फहराबो ।।

भेदभाव ला छोड़ के संगी , सबझन आघू बढ़बो ।
हिन्दू मुस्लिम सिक्ख इसाई , मिल के हम सब लड़बो ।।

अपन देश के रक्षा खातिर  , बाजी सबो लगाबो ।
कभू झुकन नइ देन तिरंगा  , झंडा ला फहराबो ।।

रानी लक्ष्मीबाई आइस , अपन रूप देखाइस ।
गोरा मन ला मार काट के , वोला मजा चखाइस ।।

हिलगे सब अंग्रेजी सत्ता  , कइसे हमन भुलाबो
कभू झुकन नइ देन तिरंगा,  झंडा ला फहराबो ।।

आन बान अउ शान तिरंगा  , लहर लहर लहराबो ।
दुनियाँ भर के सबो जगा मा , येकर यश फइलाबो ।।

भारत भुइयाँ के माटी ला , माथे तिलक लगाबो ।
कभू झुकन नइ देन तिरंगा  , झंडा ला फहराबो ।।

छंदकार - महेन्द्र देवांगन माटी
पंडरिया  (कबीरधाम)
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कुकुभ छंद - श्लेष चन्द्राकर

आजादी के परब मनाबो, जब अगस्त पंद्रह आही।
दफ्तर कालेज स्कूल मन मा, हमर तिरंगा लहराही।।

गाना गाबो देशभक्ति के , अउ सबके जोश बढ़ाबो।
उनकर मन मा अपन देश के, सेवा के भाव जगाबो।।

सुरता अमर शहीदन मन के, करबो गीत ग़ज़ल गाके।
उनकर मन के पूजा करबो, नरियर अउ फूल चढ़ाके।।

खुशी मनाये लइका मन सन, उखँर पाठशाला जाबो।
हो प्रभातफेरी मा शामिल, नारा बहुतेच लगाबो।।

झंडा फहराये जाही तब, राष्ट्र-गान सबझन गाबो।
लइका मनके कविता सुनबो, उनकर उत्साह बढ़ाबो।।

हरय हमर राष्ट्रीय परब जी, येहा पावन दिन होथे।
खुशी मनाये के मौका ला, कोन भला संगी खोथे।।

स्वतंत्रता के दिन मा जग ला, हमर एकता दिखलाबो।
हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई, सब जुरमिल परब मनाबो।।

छंदकार - श्लेष चन्द्राकर
पता - खैराबाड़ा, गुड़रुपारा, महासमुन्द (छत्तीसगढ़)
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सार छंद  - रामकली कारे
(1)
सुरता करलव सबझिन संगी ,आज अजादी पाइन ।
धरे तिरंगा झंडा ला सब ,फहर फहर फहराइन ।।
भारत माता के सेवा बर ,अड़बड़ लड़िन लड़ाई ।
भगत सिंग आजाद राज गुरु ,सैनिक बहिनी भाई ।।
(2)
भारत माँ के बेटा प्यारा ,ऐ माटी मा खोगे ।
माथ नवाँवव जी माटी ला ,ऐ तो चन्दन होगे ।।
हाँसत हाँसत फाँसी चढ़गिन,वीर हमर बलिदानी ।
अपन देश के माटी खातिर , दिंहिन हवय कुरबानी ।।
(3)
परब अजादी आज हवय जी ,जुरमिल सबो मनाबो ।
तीन रंग के धजा तिरंगा ,लहर लहर लहराबो ।।
भारत माता खातिर मरबो ,देश हमर महतारी ।
बेटा बेटी बनबो रक्छक ,भुइयाँ ले चिन्हारी ।।

छंदकार  - रामकली कारे
बालको नगर ,कोरबा ( छत्तीसगढ़ )
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चौपाई छंद--चोवा राम 'बादल '

जय किसान जय हो जवान के ।जय जय जय हो राष्ट्रगान के।।
धजा तिरंगा के जय जय हो। नजर परे बैरी मा भय हो।।

जय शहीद बलिदानी मन के। हिंद निवासी जम्मों झन के।।
अजर अमर हे भारत माता। तहीं हमर अच भाग्य विधाता।।

शांति दूत जग जाहिर गाँधी। जे सुराज के लाइस आँधी।। बाल पाल अउ लाल जवाहर। लौह पुरुष सब हवयँ उजागर ।।

जय सुभाष जे फौज बनाइच। आजादी के अलख जगाइच।।
भगत सिंग बिस्मिल गुरु अफजल। गोरा मन के टोरिन नसबल।।

ऊँचा माथ चंद्रशेखर के। गौरव गाथा हे घर घर के।।
रानी लक्ष्मी झाँसी वाली। दुर्गावती लड़िस जस काली ।।

कतको झन हावयँ बलिदानी। जिंकर कोनो नइये सानी।। महराणा वो चेतक वाला। जेन अपन नइ छोड़िच भाला ।।

वीर शिवाजी सुरता आथे। रोम-रोम पुलकित हो जाथे।। देवभूमि माँ हे कल्यानी। पबरित गंगा जमुना पानी ।।

सेवा मा सब हावय अरपन। बादल के  ए तन मन अउ धन।।
रहिबे छाहित भारत माता ।सरग सहीं सब सुख के दाता ।।

छंदकार - चोवा राम 'बादल '
              हथबन्द ,छत्तीसगढ़
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त्रिभंगी छंद - अशोक धीवर "जलक्षत्री"

झंडा फहरावौ, सबझन आवौ, देश मनावत, परब बने।
सब भेद भुलाके, सँग मा आके, गला लगाके, रहव तने।।
काशी कस गंगा, हमर तिरंगा, पावन निर्मल, शान हरे।
भारत माता के, कोख म आके, बिरथा कोनो, झन ग मरे।।

छंदकार - अशोक धीवर "जलक्षत्री"
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आल्हा छंद - इंजी.गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

आजादी का खुशी मनावँव,देख दुखी भारत के हाल।
भ्रष्टाचारी अत्याचारी,बने हवय जी के जंजाल।।

माटी सोन चिरैया के जी,होवत हे अब लहू लुहान।
कोन उगावय भारत भुइयाँ,समता राखे नवा बिहान।।

जाति धरम मा देश बँटे हे, राजनीति के कइसन खेल।
समतावादी समाज के अब,दूर दूर तक नइहे मेल।।

अंधभक्ति मा लोग बुड़े हें,सही गलत के नइ पहिचान।
ज्ञान विज्ञान सबो हे भूले,धर्म जरी मा फँसे नदान।।

आजादी के मतलब बदले,बदले हे  उल्टा परिवेश।
नारी के तो इज्जत लूटे,साधु बलात्कारी धर भेष।।

छाप छाप मा देश बँटे हे,नोट वोट मा आज समाज।।
नेता बनगे हे दल बदलू,कोन करय जन हित मा काज।।

एक मरत हे दू रोटी बर,एक करत हे छप्पन भोग।
ये विकास हे देख देश मा,लगे इहाँ  मतलब के रोग।।

न्याय मिले के ख्वाब छोड़ दे,अँधरा बनगे हे कानून।
दीन दलित बर लाठी बरसे,सच्चाई के होवत खून।।

अब शहीद के कुरबानी ला,कोन भला जी रखथे याद।
खून बहा के जेन करिन हें,भारत भुइयाँ ला आजाद।।

तहीं बता दे कइसे देवँव,आज बधाई के संदेश।
मन मा भारी पीरा उमड़े,कोन मिटावय जी ये क्लेश।।

छन्दकार - इंजी.गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़)
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कज्जल छंद - मोहन लाल वर्मा
(1)
हमर देश के गा जवान ।
रतिहा होवय या बिहान ।
राख हथेरी मा परान ।
चलथे सीना अपन तान ।।
(2)
मानँय नइ वो कभू हार  ।
रहिथे  रण बर गा तियार  ।
भागय नइ हथियार डार ।
आघू बढ़के करय वार ।।
(3)
सुरता पुरखा के लमाय ।
माथ तिलक माटी लगाय ।
कफन तिरंगा बड़ सुहाय ।
मान  देश के गा बढ़ाय ।।

छंदकार- मोहन लाल वर्मा,
पता- ग्राम -अल्दा,वि.खं.-तिल्दा, जिला-रायपुर (छत्तीसगढ़)
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सार छन्द - जीतेन्द्र वर्मा खैरझिटिया

कहाँ चिता के आग बुझे हे,हवै कहाँ आजादी।
भुलागेन बलिदानी मन ला,बनके अवसरवादी।
(1)
बैरी अँचरा खींचत हावै,सिसकै भारत माता।
देश धरम बर मया उरकगे,ठट्ठा होगे नाता।
महतारी के आन बान बर,कौने झेले गोली।
कोन लगाये माथ मातु के,बंदन चंदन रोली।
छाती कोन ठठाके गरजे,काँपे देख फसादी।
भुलागेन बलिदानी मन ला,बनके अवसरवादी।
(2)
अपन  देश मा भारत माता,होगे हवै अकेल्ला।
हे मतंग मनखे स्वारथ मा,घूमत हावय छेल्ला।
मुड़ी हिमालय के नवगेहे,सागर हा मइलागे।
हवा बिदेसी महुरा घोरे, दया मया अइलागे।
देश प्रेम ले दुरिहावत हे,भारत के आबादी।
भुलागेन बलिदानी मन ला,बनके अवसरवादी।
(3)
सोन चिरइयाँ अउ बेंड़ी मा,जकड़त जावत हावै।
अपने मन सब बैरी होगे,कोन भला छोड़ावै।
हाँस हाँस के करत हवै सब,ये भुँइया के चारी।
देख हाल बलिदानी मनके,बरसे नैना धारी।
पर के बुध मा काम करे के,होगे हें सब आदी।
भुलागेन बलिदानी मन ला,बनके अवसरवादी।
(4)
बार बार बम बारुद बरसे,दहले दाई कोरा।
लड़त  भिड़त हे भाई भाई,बैरी डारे डोरा।
डाह द्वेष के आगी भभके,माते मारी मारी।
अपन पूत ला घलो बरज नइ,पावत हे महतारी।
बाहिर बाबू भाई रोवै,घर मा दाई दादी।
भुलागेन बलिदानी मन ला,बनके अवसरवादी।

छन्दकार - जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"
बाल्को(कोरबा) छत्तीसगढ़
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आल्हा छंद - राजेश कुमार निषाद

आय परब हे आजादी के,मिलके संगी खुशी मनाव।
तीन रंग के हमर तिरंगा,लहर लहर गा सब लहराव।।

मिले देश ला आजादी हे, पुरखा मनके हे बलिदान।
धजा तिरंगा लहरा भइया, करव आज गा सब गुणगान।।

बइरी मन ला हमर देश मा, झन आवन देहू तुम आज।
डटे रहू गा सीमा मा सब, रखहू भारत माँ के लाज।।

कर लव सेवा भारत माँ के, प्रण ला सुग्घर मन मा ठान।
बइरी मन ला मार भगावव, चाहे निकले तन ले प्राण।।

बइरी मन ला दूर भगाके, रखव धजा के हरदम शान।
अमर रहय दिन आजादी के, जय भारत जय हिंदुस्तान।।

छंदकार - राजेश कुमार निषाद ग्राम चपरीद पोस्ट समोदा तहसील आरंग। जिला रायपुर छत्तीसगढ़ ।
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छप्पय छन्द - उमाकान्त टैगोर

जारे बेटा आज, पउल के गर्दन  लाबे।
कहलाबे तँय वीर, मारबे या मर जाबे।।
दाई आवँव तोर, कहत हँव हाँसत तोला।
रक्षा करबे देश , गरब होही बड़ मोला।।
बैरी के छाती चीर दे, अंतस मा हुंकार भर।
झंडा तँय धर ले हाथ मा, जोर लगा जयकार कर।।

अमृतध्वनि छन्द - उमाकान्त टैगोर

सेवा करिहँव देश के, जब तक हाबय जान।
धरती मैय्या तोर मँय, नइ जाये दँव शान।।
नइ जाये दँव, शान तोर मँय, रक्षा करिहँव।
दुनिया खातिर, मँय हर लड़िहँव, तब तो तरिहँव।।
झन तँय रोबे, सुन दाई तँय, जब मँय मरिहँव।
जीयत भर ले, ये भुइँया के, सेवा करिहँव।।

छंदकार - उमाकान्त टैगोर
कन्हाईबंद, जाँजगीर छत्तीसगढ़
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लावणी छन्द - राम कुमार चन्द्रवंशी

आजादी के दिन आगे जी,चलव तिरंगा फहराबो।
भारत माँ के जय के नारा,चारों कोती गूँजाबो।।

इही तिरंगा खातिर पुरखा,लेइस हावय पंगा जी।
पुरखा के बलिदान के चिन्हा,आवय हमर तिरंगा जी।।

बलिदानी के जस ला संगी,घर-घर मा बगरालव जी।
जात-धरम तुम आज भुलाके,सुग्घर खाँध मिलालव जी।।
पुरखा मन के सपना संगी,हम ला आज सधाना हे।
आजादी के महा परब ला, जुरमिल आज मनाना हे।।

छन्दकार - राम कुमार चन्द्रवंशी
बेलरगोंदी(छुरिया) जिला-राजनांदगाँव, छत्तीसगढ़
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चौपाई छंद- पोखन लाल जायसवाल

बरनवँ का-का गौरव गाथा,भारत भुइयाँ टेंकवँ माथा।
मुकुट बने गिरिराज हिमालय, महा समुंदर पाँव पखारय।।

देश भक्ति के गीत सुनाबो,भारत माता के जय गाबो।
अजर-अमर होगे बलिदानी,आजादी बर दे कुर्बानी।।

छुआछूत बर बन के आँधी,जनम लीन हे बापू गाँधी।
भगत खुदी कतको बलिदानी,आजादी बर दीस जवानी।।

आजादी के दिन आए हे,तन मन सबके हरसाए हे।
लइका सबो लगाए नारा,झंडा ऊँचा रहे हमारा।।

केसर सादा हरियर प्यारा,झंडा हावय सबले न्यारा।
नील गगन मा गूँजय नारा,देश हमर जिनगी ले प्यारा।।

सैनिक सीना तान खड़े हे,जान हाथ मा धरे अड़े हे।
सीमा पार लगाही बइरी,वोला मार मताहूँ गइरी।।

छंदकार - पोखन लाल जायसवाल
पठारीडीह (पलारी)जिला बलौदाबाजार भाटापारा छग
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17 comments:

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  3. एक से बढ़के एक छंद रचना,लाजवाब।
    स्वतंत्रता दिवस के श्रद्धेय गुरुदेव सहित आप सबो साधक मन ला बहुत बहुत बधाई!!

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  4. घात सुग्घर छंद पोटली। धन्यवाद गुरुदेव जी

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  5. स्वतंत्रता दिवस विशेषांक मा सुग्घर सुग्घर छंद के संकलन होय हे, गुरुदेव ।सादर प्रणाम ।सबोयशस्वी साधक मन ला हार्दिक बधाई अउ शुभकामना हे ।

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  6. गजब सुग्घर संकलन

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  7. गजब सुग्घर संकलन

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  8. गजब सुग्घर संकलन

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  9. सबोझन के रचना बहुत बढ़िया लागीस ।
    सबझन ला गाड़ा गाड़ा बधाई हे ।

    महेन्द्र देवांगन माटी

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  10. अति सुन्दर संग्रह गुरुदेव जी । सादर नमन ।

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  11. बहुत बढ़िया संकलन ...गुरुदेव के मिहनत अउ सबो रचनाकार मन ला बहुत बधाई

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  12. सुग्घर संकलन। गुरुदेव जी ला सादर नमन संगे संग जम्मो रचनाकार मन ला हार्दिक बधाई।।

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  13. जम्मों साहित्यकार मन ला गाड़ा गाड़ा बधाई💐💐
    सुग्घर संकलन हे गुरुदेव

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  14. सुग्घर संकलन। गुरुदेव जी ला सादर नमन संगे संग जम्मो रचनाकार मन ला हार्दिक बधाई।।

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  15. शानदार रचना बर जम्मो कवि मन ल बधाई
    🌹🌹🌹🌹🙏🙏🙏

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