Monday, October 15, 2018

चौपाई छंद - श्रीमति आशा आजाद

दुर्गा दाई ले अवतार

आगे देखव अब नवराती। फेर जलावव दीया बाती।
पाप खतम कइसे होही माँ। नारी कब तक ले रोही माँ।

दुर्गा दाई ले अवतारी। नारी मनके दुख हे भारी।
कतका पीरा ल गोहरावौं। पग-पग दुख ला मँय हा पावौ।।

अवतारी बनके तँय आजा। नारी के पीरा ल मिटाजा।
चारो कोती अत्याचारी। मान लुटे कइसन लाचारी।।

जगा-जगा हे छुपे लुटेरा। नारी राखै कहाँ बसेरा।
आके तँय हा पार लगादे। पापी मन ले न्याय दिलादे।।

नान-नान नोनी के पीरा। जाय सुनावव काखर तीरा।
रोवत बिलखत रोजे सुनले। मात गोहार थोरक गुन ले।।

कलयुग मा नइ जीना मोला। आज बलावव दुर्गा तोला।
चुप्पे बइठे देखत दाई। अनाचार ले हे करलाई।।

मानवता ला देख भुलागे। मानुष कतका आज रुलागे।
खून खराबा बाढ़त जावै। आबे तँय हा आस लगावै।।

तँय ता सबके तारनहारी। कहे जगत तोला महतारी।
दाई कलयुग मा तँय आजा। नारी के अब लाज बचाजा।।

रचनाकार - श्रीमती आशा आजाद
पता-मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़