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Monday, December 9, 2019

सार छंद : पोखन लाल जायसवाल

सार छंद : पोखन लाल जायसवाल

आवव जुरमिल खावन किरिया,पानी अभी बचाबो।
बूँद-बूँद हर हवय कीमती,सब ला आज बताबो।।१

एती ओती खोजत हावन,छइहाँ बइठ जुड़ाबो।
जंगल झाड़ी बर तरसत हन,आवव पेड़ लगाबो।।२

नरवा नदिया सुक्खा परही,मुड़ धर तब सब रोही।
पेड़ लगालन भुइयाँ मा तब,दुख कोनो नइ होही।।३

घाम जेठ के बहुते हावय,खोजय छाँव बटोही।
काट काट के रुख राई अब,मनखे अब्बड़ रोही।।४

चारों मुड़ा धुआँ उगलत हे,सब विकास के गाड़ी।
धरे कारखाना मन बाना,लीलय खेती बाड़ी।।५

जीव जनावर छोड़त जंगल,गाँव डहर आवत हे।
खेत-खार के धान-पान जब,खाए बर पावत हे।।६

घूम-घूम के हाथी राजा, गुस्सा घला दिखावय।
जंगल झाड़ी हमर जान लौ,रहि रहि बात बतावय।।७

गरुवा पालव पोसव जतनव,नरवा घुरवा बारी।
जल जमीन जंगल ले कोनो,कइसे होही भारी।।८

आवव जुरमिल खा लन किरिया,दया मया ले रहिबो।
रोटी जइसन बाँट बाँट के,दुख पीरा ला सहिबो।।९

छंदकार : पोखन लाल जायसवाल
पठारीडीह( पलारी )जिला बलौदाबाजार
 भाटापारा छग.

4 comments:

  1. बहुत सुग्घर सार छंद, का बात से भैया जी। जोरदार प्रस्तुति

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  2. सुग्घर भाई,पानी बचाय बर सुग्घर संदेश👌👏👍💐💐

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