संसद (दोहा छंद)
1-
संसद मा हल्ला मचै, खूब तमाशा होय।
इक-दूसर ला दोष दँय, कोन दूध के धोय।
2-
संसद मा माते हवै, देख भयानक रार।
इक-दूसर बर भाँजथें, जस बैरी तलवार।।
3-
संसद के हालत दिखै, जस मछरी बाजार।
हल्ला-गुल्ला बड़ मचै, होय बिकट तकरार।।
4-
मचे अखाड़ा अब इहाँ, संसद हे लाचार।
नैतिकता बाँचे कहाँ, खोये सद् ब्यौहार।।
5-
"बाबू" संसद देख ले, बने युद्ध मैदान।
सत्ता बर लड़थे इहाँ, कहाँ प्रजा के ध्यान।।
कमलेश प्रसाद शर्माबाबू
कटंगी-गंडई
जिला केसीजी छत्तीसगढ़