03 जून विश्व साइकिल दिवस विशेष -
*दोहा छंद- साइकिल*
बिना धुआं के कार ये, बिना तेल के शान।
जेन चलावय साइकिल, वो हे चतुर सुजान।।
सेहत बर वरदान बन, रखथे तन खुशहाल।
पैडल मारव प्यार से, बदल जही हर चाल।।
दूर करय ये रोग सब, तन मा जगय उमंग।
बचपन के सुरता दिला, भरय खुशी के रंग।।
भेद अमीर गरीब के, छोड़ रहय सब साथ।
सस्ता सुंदर सारथी, थामय सबके हाथ।।
आज धरा रोवत हवय, देख प्रदूषण भार।
अपनावव सब साइकिल, करव प्रकृति उद्धार।।
चलव चलिन पटरी पकड़, छू लिन नवा अगास।
करिन सवारी साइकिल, होही जगत विकास।।
✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़)03/06/2026
[6/3, 3:26 PM] वासन्ती: साइकिल दिवस के अवसर मा
मोर रचना सार छंद मा
शीर्षक ( साइकिल )
1) एक सीट अउ दू पहिया के,सुविधा जनक सवारी।
तीन जून साइकिल दिवस हे,जगत चलावे सारी।।
2)बिगन तेल के येहर चलथे,साइकिल बिसा लेवा।
लइका सियान बड़का छोटे,सबो ला बता देवा।।
3)गाँव गाँव अउ सहर सहर मा,आज साइकिल चलथे।
डामर रोड चला के देखव,हवा से बात करथे।।
4)इस्कुल जाथे लइका मन जी,सबो साइकिल चढ़के।
केरियर मा चिपे रइथे जी,बस्ता ला भर भरके।।
वसन्ती वर्मा बिलासपुर 🍂