Followers

Sunday, September 20, 2026

संसद (दोहा छंद)

 संसद (दोहा छंद)

1-

संसद मा हल्ला मचै, खूब तमाशा होय।

इक-दूसर ला दोष दँय, कोन दूध के धोय।

2-

संसद मा माते हवै, देख भयानक रार।

इक-दूसर बर भाँजथें, जस बैरी तलवार।।

3-

संसद के हालत दिखै, जस मछरी बाजार।

हल्ला-गुल्ला बड़ मचै, होय बिकट तकरार।।

4-

मचे अखाड़ा अब इहाँ, संसद हे लाचार।

नैतिकता बाँचे कहाँ, खोये सद् ब्यौहार।।

5-

"बाबू" संसद देख ले, बने युद्ध मैदान।

सत्ता बर लड़थे इहाँ, कहाँ प्रजा के ध्यान।।


कमलेश प्रसाद शर्माबाबू 

 कटंगी-गंडई 

जिला केसीजी छत्तीसगढ़