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Wednesday, April 1, 2026

सखी छंद सूरज राजा

 सखी छंद 


सूरज राजा 


सूरज आय दिखै ताजा।

रोज सुबे दरसे राजा।


पूरब ले वो निकले हे।

जइसे कुहकू बुक ले हे।


सुनहा किरण बिखेरे हे।

सात अश्व रथ फेरे हे।


शनि राजा के बाबू जी।

रखै हवै बड़ काबू जी।


दहके धरा भुँजा जाथे।

हे प्रचंड अग्नी माथे।


बड़े छोट वो नइ माने।

सब ला अपने ही जाने।


सब ला सम रौशन देथे।

बदला मा कुछ नइ लेथे।


पत्नी संज्ञा अउ छाया।

बेटी भद्रा हे माया।


सब ले बढ़ के वो दानी।

रोज सुबे देवव पानी।


रखौ एक ताँबा लोटा।

सुबे अर्घ देवव बेटा।


जेन सुरुज के गुन गाही।

"शर्मा बाबू" सुख पाही।


कमलेश प्रसाद शर्माबाबू✍️

कटंगी-गंडई 

जिला केसीजी छत्तीसगढ़