*गणपति वंदना*
सबो काज शुभ होथे स्वामी, पहिली पूजँय तोला।
माता पार्वती के ललना, पिता तोर शिव भोला।।
भादो पाख अँजोरी आथस, मुसवा करे सवारी।
चार भुजा अउ सूँड़ लाम बड़, पेट बिकट हे भारी।।
सूपा कस हे कान गजानन, तिलक माथ के प्यारी।
दर्शन करके खुशी मनाथें,पायँ कृपा नर नारी।।
भक्ति भाव ले पूजय जेहर, सब सुख देथस ओला।
सबो काज शुभ होथे स्वामी ..................
एकदंत लाड़ू ला भाथस,खाथस थारी-थारी।
लगे मनोहर रूप विनायक, रिद्धि-सिद्धि सँगवारी।।
चारो डहर उछाव लगे अउ, महके खोर दुवारी।।
गणपति बप्पा जल्दी आबे, कहे भगत ए दारी।।
पान सुपारी धरे मनाथे, कोनो नरियर गोला।
सबो काज शुभ होथे स्वामी ..................
अँधरा ला तँय आँखी देथस, हर लेथस अँधियारी।
पूत बाँझ ला देथस देवा, कर अँगना उजियारी।।
दूध पूत धन धान्य सबो झन, पाथे तोर पुजारी।
काया माया दे हर लेथस, पाप दोष बीमारी।।
चंदन के प्रभु हृदय बिराजव, दर्शन दे दव मोला।
सबो काज शुभ होथे स्वामी ..................
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नारायण प्रसाद वर्मा चंदन
ढाबा-भिंभौरी, बेमेतरा छग
7354958844