Followers

Saturday, February 7, 2026

माघ महीना-छंदबद्ध कविता

 माघ महीना-छंदबद्ध कविता


[1/10, 1:28 PM] Dropdi साहू 15 Sahu:

 ‌‌   छप्पय छंद -"माघ महीना"

मन ला सुग्घर भाय, आय ले माघ महीना।

फरियर दिखे अगास, जाड़ लागे झिनाझिना।।

रुसरुस बने सुहाय, घाम जोड़ी जाड़ा के।

हलुहलु बिसरत जाय, जाड़ बइरी हाड़ा के।।

पूस भागती जाय ले, माघ मया ले आय जी।

लजकुरहीन लजाय हे, लाग लगिन लगवाय जी।।


लिहे सुवारी आस, मउर बाँधे बर आमा।

गुछी गुछी कोचियाय, माघ पहिरे पैजामा।।

किसम किसम के फूल, झूल पहिरे हे बारी।

आवत देख बसंत, कोइली हे मतवारी।।

लगे सोलवाँ साल हे, परसा फुलवा लाज मा।

लहकत लाली गाल हे, लाल रंग के साज मा।।


आरो दय मधुमास, माघ के पुरवाही मा।

महर महर ममहाय, फूल आवाजाही मा।।

मँगनी लगिन धराय, जान के मुहुरुत नित्ता।

कतको करे बिहाव, फेर हो जाय सुभित्ता।।

माघी पुन्नी आय ले, मेला गजब भराय जी।

नदिया मा असनान के, शिव के दर्शन पाय जी।।


द्रोपती साहू "सरसिज"

💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐

[1/18, 9:57 AM] दीपक निषाद, बनसांकरा: *माघ महीना (गीतिका छंद)* 

-----------------------------------


माघ महिना आय ले कमती जनावय जाड़ हा।

रौनिया भावय गजब नइ कँपकँपावय हाड़ हा।।

आय रितुराजा घलो सुघ्घर लगय चहुँओर जी।

देख परसा मौर सरसो नाचथे मन मोर जी।।


दीपक निषाद--लाटा (भिंभौरी) बेमेतरा

💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐

[1/24, 7:55 AM] तातुराम धीवर 21: आल्हा छन्द-


माघ महीना पावन पबरित, सबके मन हावय हर्षाय।

हाँसत कुलकत मौर बाँध के, देखव राजा बसंत आय।।


मकर संक्रांति के शुभ बेरा,दान पून कर धरम कमाय।

‌बाँधय घर घर तिलि लाड़ू , लइका मन पतंग उड़ियाय।।


माघ महीना मँगनी जँचनी, बिहा तेल हे लगिन धराय।

नोनी बाबू करय सगाई, पर्रा बिजना मौर बिसाय।।


माघ महीना आमा मौरे, परसा सरसों हे मन भाय।

महर महर महमावय धरनी, पुरवाई हे गीत सुनाय।।


तिथि पंचमी बसंत परब हे, मातु सारदा के गुण गाय।

पूजन करके महतारी के, भगतन हे अंतस उजराय।।


ज्ञान कला संगीत कला के, होवय अड़बड़ हे बढ़वार।

पार लगावय मझधारा मा, खेवय नाँव धरे पतवार।।


माघी पुन्नी शिव दरसन बर, देव मनुज तन धरके आय।

गावय बम बम बम शिव भोला, चिमटा डमरू ढोल बजाय।।


होत बिहनिया पुन्य काल मा, गंगा मा सब डुबक नहाय।।

अइसन सुग्घर माघ महीना, मन पावन निर्मल हो जाय।


     तातु राम धीवर 

भैसबोड़ जिला धमतरी

बसंत विशेष छंदबद्ध सृजन

 बसंत विशेष छंदबद्ध सृजन


[1/28, 2:50 PM] तातुराम धीवर 21:

 सरसी छ्न्द -16, 11


नइ तो जादा जाड़ा लागय, नइ तो लागय घाम।

नइ तो जादा कनकन लागय,नइ तो तीपय चाम।।


मउसम बड़ा सुहावन हावय, होय शीत के अंत।

देखव आगे हाँसत कुलकत, मस्ती भरे बसंत।।


ऋतु बसंत के आये ले जी, खिलय प्रकृति के अंग।

अंग-अंग हरियाली छावय, दिखय अनेकव रंग।।


पीँयर -पीँयर सरसों फूलय, परसा फूलय लाल।

जउने देखय तउने बोलय, प्रकृति हावय कमाल।।


नवाँ-नवाँ उलहोवय पाना, रंग बिरंगी फूल। 

रखव सदा सनमान प्रकृति के, झिन जावव जी भूल।।


चिरई-चिरगुन जीव-जंतु मा, अड़बड़ के उत्साह।

देखत लागय ऋतु बसंत हे, खड़े पसारे बाँह।।


परब महाशिवरात्रि पंचमी,  होरी हर्सोल्लास।

पावन तिहार ऋतु बसंत के, इह तीनों हे खास।।


    तातु राम धीवर 

भैसबोड़ जिला धमतरी


💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐

[2/1, 10:23 PM] दीपक निषाद, बनसांकरा: *बसंत (कुण्डलिया छंद)* 

-------------------------------


रितु बसंत के आय ले, माटी हा ममहायँ।

मउरे आमा मस्त हें,गहूँ गजब लहरायँ।।

गहूँ गजब लहरायँ,नीक सरसो फुलवा मन।

परसा सेम्हर फूल,लगयँ सुघ्घर मनभावन।।

कोयलिया मन कूक, सुनावयँ मन पसंद के।

प्रकृति करय सत्कार, सुवागत रितु बसंत के ।।


दीपक निषाद--लाटा (भिंभौरी)-बेमेतरा

[2/2, 8:40 AM] पात्रे जी: कुण्डलिया छन्द- *बसंत*


छाये रंग बसंत के, हरा गुलाबी लाल।

मउरे हावय आम अउ, कोयल कुहके डाल।।

कोयल कुहके डाल, बिरह के गाये गाना।

रुखवा करे किलोल, सजा तन हरियर पाना।।

रंग बिरंगी फूल, हवय बगिया महकाये।

हे रितुराज बसंत, माह फागुन मा छाये।।


✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़)

💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐

[2/4, 12:25 PM] मीता अग्रवाल: *घनाक्षरी छंद* 

मऊरेंआमा के डार, नदिया के आर-पार 

कुहकत-कोयलिया,फरे- फूले बाग मा।


मन-डोले तन-डोले,भुनन भंवरा बोले 

रितुराज रंग घोलें, फगुनिया राग मा।


 गेंदा टेसु फूल फूलें, केसरिया रंग घुले,

मांदर नँगारा बाजे, फागुन के भाग-मा।


बसंत के अगुवाई,करें मिलजुल भाई,

होरी पहिली तैयारी, गावों मिल फाग-मा। 


शीत नित भागत हे, धूप-छांँव जागत हे,

छिन-छिन बाढ़ें दिन,सुरूज के ठाँव मा।


बसंती हे पुरवाई,घनन घटा छाईत,

मन-मा उमंग भरे,कदंब के छाँव मा।



रितु ह सिंगार करें,डारा पाना झड़े फरे,

कामदेव बाण धरे,बांटे मया दाँव मा।


बसंती बयार बहे,रुखराई फूले फरे,

अमराई मऊरे हे,गोरी तोरे गाँव मा।।


डॉ मीता अग्रवाल मधुर रायपुर छत्तीसगढ़

💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐