Followers

Tuesday, February 17, 2026

विधान- *सोरठा छंद*

विधान- *सोरठा छंद*


विधान-

*ये एक अर्द्धसम मात्रिक छ्न्द आय*

*ये दोहा के उल्टा छंद आय*

*कहे के मतलब एमा 13,11 के जघा 11,13 के नियम होथे, विषम चरण म 11,11 अउ सम चरण म 13,13 मात्रा होथे*

*तुकांत विषम चरण म अनिवार्य रहिथे*

*दोहा के संग राग परिवर्तन बर ये छंद के उपयोग होथे*

*रामचरित मानस में गोस्वामी तुलसीदास जी ये छंद के बहुतायत प्रयोग करे हे*


उदाहरण-


जो सुमिरत सिधि होय, गननायक करिवर बदन।

करहुँ अनुग्रह सोय, बुद्धि रासि शुभ-गुन सदन॥


*नील सरोरूह स्याम, तरुन अरुन बारिज नयन।*

*करऊँ सो मम उर धाम, सदा छीरसागर सयन ।।*


तुलसीदास

No comments:

Post a Comment