Friday, December 8, 2017

दोहा छन्द - श्री जगदीश "हीरा" साहू

छत्तीसगढ़ के 36 भाजी-

भाजी  *तिवरा*  *गोंदली*,  *मुनगा*  अउ *बोहार*।
*चुनचुनिया* अउ *चौलई*,मिलय *चरोटा* खार।।

*कुरमा पटवा  खेंडहा*, *पुतका*  भाजी *लाल*।
*भथवा आलू लहसुवा*, *सरसों* करे कमाल।।

*गोभी कुसुम  मछेरिया,बर्रे  मखना* लाय।
*चना अमारी* राँध ले, *कजरा* गजब सुहाय।।

*गुडरू  उरला  चिरचिरा,  चेंच  चनौरी* सार।
*तिनपनिया* अउ *करमता*, *कांदा* बगरे नार।।

*पालक मुसकेनी* हवय, सब भाजी मा शान।
*उरला मुरई* खाय जब, कोंदा  करय  बखान।।

भाजी-भाजी झन कहव, एकर करव बखान।
खावव  येला  मन  लगा, हो जावव बलवान।।

 रचनाकार - श्री जगदीश "हीरा" साहू
ग्राम - कड़ार, व्हाया भाटापारा
छत्तीसगढ़

14 comments:

  1. वाह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् बहुँत सुग्घर भाजी मन के बखान करत दोहा सिरजाय हव।बधाई।

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  2. बहुत सुघ्घर भाजी के महिमा बखान करे हव जगदीश जी।।बधाई

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  3. भाजी के महिमा कहिस, अनुज मोर जगदीश
    कतका सुग्हर - नाव हे, दुनियाँ भर के ईश।

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  4. व्वाहःहः बहुत सुघ्घर भाजी महिमा सृजन करे हव भाई

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  5. वाह्ह भईया अब्बड़ सुग्घर भाई जम्मो भाजी मनके बखान गा

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  6. बहुत सुघ्घर छत्तीस भाजी के दोहा लिखे हव जगदीश भाई पढ़के मोला बढ़ियाँ लागिस बधाई हो

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  7. अरे क्या बात है भाई जी सुग्घर वर्णन करे हव

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  8. अरे क्या बात है भाई जी सुग्घर वर्णन करे हव

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  9. बहुत सुग्घर।छत्तीसगढ़ के भाजी बर बड़ सुग्घर दोहावली सिरजाय हव,भैया।बहुतबहुत बधाई अउ शुभकामना।

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  10. सुग्घर दोहा वली

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  11. घातेच् सुग्घर दोहावली।सादर बधाई

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  12. घातेच् सुग्घर दोहावली।सादर बधाई

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  13. भाजी के भरमार हे, सबके हे गुन दोस।
    राँधे के दरकार हे, लेबो हमी परोस।।
    अतेक नाव गनाये हें भाई हर के सुरता रखई मुसकुल हो जही....

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