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Monday, March 31, 2025

छत्रपति वीर शिवाजी

 छत्रपति वीर शिवाजी महराज जयंती के हार्दिक बधाई।


छत्रपति वीर शिवाजी

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पइयाँ लागवँ गणपति गुरु के, हाथ जोड़ के माथ नँवाय।

 बिनती सुन लौ शारद माता, भूले बिसरे देहु बताय।।


जस ला वीर शिवा के गाववँ, महिमा जेकर अगम अपार ।

क्षत्रिय कुल में जनम धरे तैं, कुर्मी जाति कहय संसार।।


 किला बखानवँ शिवनेरी के, जनम लिए  सोला सौ तीस।

नाम शिवाजी राखिस दाई,शिव भोला के पाय असीस।।


माता धरमिन जीजाबाई, पिता शाहजी सूबेदार।

 कोणदेव गुरु के किरपा ले, सीखे तैं भाला तलवार।।


 सिधवा बर तो अब्बड़ सिधवा, बैरी बर तो सँउहे काल।

 परम भक्त माता तुलजा के, जय हो भारत माँ के लाल।। 


धरम करम ले पक्का हिंदू, हिंदू के पाये संस्कार।

 गउ माता के रक्षा खातिर, युद्ध करे तैं कतको बार।।


 बालकपन में करे लड़ाई, बैरी मन ला दे ललकार।।

 कब्जा करे किला मा कतको, लड़े लड़ाई छापामार।।


 बीजापुर के राजा बैरी, नाम कहावै आदिलशाह।

 तोर भुजा ला तउलत मरगे, फेर कभू नइ पाइस थाह।।


 समझौता के आड़ बलाके ,लेये खातिर तोरे जान।

 घात लगाये धरे कटारी, कपटी पापी अफजल खान।।


 दाँव ह ओकर उल्टा परगे,समझ गये तैं तुरते चाल।

 बघनक्खा मा ओला भोंगे,यमराजा कस बनके काल।।


 देखे सेना ला मालव के, जीव मुगलिया के घबराय ।

जइसे बघवा के तो छेंके,ठाढ़े हिरना प्रान गँवाय।।


अइसे फुरती जइसे चीता, भुजा म ताकत भीम समान।

रूप दिखय जस पांडव अर्जुन,धरे हाथ मा तीर कमान।।


 औरँगजेब बलाके दिल्ली, पकड़ जेल मा देइस डार।

फल के टुकनी मा छिप निकले, गम नइ पाइन पहरेदार।।


दसों दिशा मा डंका बाजय,धजा मराठा के लहराय।

कतका महिमा तोर बखानवँ,मोरे मति हा पुर नइ पाय।।


 जै जै जै जै वीर शिवाजी, निसदिन तोर करवँ गुणगान।

जै होवय भारत माता के, जेकर बेटा तोर समान।।


चोवा राम वर्मा 'बादल '

हथबंद, छत्तीसगढ़

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