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Thursday, July 9, 2026

अपन खेत म ऐसो का का धान बोवत हव? किसम किसम के धान(सार छंद)

 अपन खेत म ऐसो का का धान बोवत हव?


किसम किसम के धान(सार छंद)


धान कटोरा हा धन धरके, मुचुर मुचुर मुस्काही।

धरती दाई के कोरा मा, धान गजब लहराही।।


हवै धान के नाम हजारो, कहौं काय मैं भाई।

देशी अउ हरहुना संकरित, मोटा पतला माई।

लाली हरियर कारी पढ़री, धान चँउर तक होथें।

सुविधा देख किसनहा मन हा, खेत खार मा बोथें।

मुंदरिया मरहन महमाया, मछलीपोठी मेहर।

मालवीय मकराम माँसुरी, कार्तिक कैमा कल्चर।

चनाचूर चिन्नउर चेपटी, छतरी चीनीशक्कर।।

बाहुबली बलवान बंगला, बाँको बिरसा बायर।

बिरनफूल बुढ़िया बइकोनी, बिसनी बरही माही।

धान कटोरा हा धन धरके, मुचुर मुचुर मुस्काही।


पंत पूर्णिमा पंकज परहा, परी प्रसन्ना प्यारी।

पूर्णभोग पानीधिन पंसर, नाकपुरी नरनारी।

आईआर अर्चना झिल्ली, अजय इंदिरासोना।

समलेश्वरी सुजाता साम्भा, सागरफेन सरोना।

कालाजीरा कनक कामिनी, करियाझिनी कलिंगा।

साहीदावत सफरी सरना, सरजू सिंदुरसिंगा।।

स्वेतसुंदरी सादसरोना, सहभागी सुरमतिया।

गंगाबारू गुड़मा गोकुल, गोल्डसीड गुरमटिया।

बासमती दुबराज सुगंधा, विष्णुभोग ममहाही।

धान कटोरा हा धन धरके, मुचुर मुचुर मुस्काही।


क्रांति किरण कस्तूरी केसर, नयना बुधनी काला।

कालमूंछ केरागुल कोड़ा, बरसाधानी बाला।

कंठभुलउ केकड़ा ककेरा, कदमफूल कनियाली।

कावेरी कमोद कर्पूरी, कामेश कुकुरझाली

रामकली राजेंद्रा रासी, राधा रतना रीता।

सहयाद्री सन सोनाकाठी, सोनम सरला सीता।

जसवाँ जीराफूल जोंधरा, जगन्नाथ जयगुंडी।

जया जयंती जयश्री जीरा, लौंगफूल लोहुंडी।

सत्यकृष्ण साठिया शताब्दी , बादशाह अन साही।

धान कटोरा हा धन धरके, मुचुर मुचुर मुस्काही।


पूसा पायोनियर नन्दिनी, नाजिर नुआ नगेसर।

गटवन गर्राकाट गायत्री, खैरा रानीकाजर।

रतनभाँवरा राजेलक्ष्मी, आदनछिल्पा रामा।

तिलकस्तूरी तुलसीमँजरी, जवाँफूल सतभामा।

गाँजागुड़ा नवीन नँदौरी, काली कुबरीमोहर।

दन्तेश्वरी दँवर डॅक दुर्गा, दांगी खैरा नोहर।

हहरपदुम हंसा सन बोरो, हरदीगाभा ठुमकी।

लुचई भुसवाकोट भेजरी, लूनासंपद झुमकी।

कलम फाल्गुनी फूलपाकरी, इलायची मन भाही।

धान कटोरा हा धन धरके, मुचुर मुचुर मुस्काही।


जीतेंद्र वर्मा"खैरझिटिया"

बाल्को,कोरबा(छग)

पंडवानी गौरव: पद्मविभूषण डॉ. तीजन बाई

 पंडवानी गौरव: पद्मविभूषण डॉ. तीजन बाई 


आल्हा छन्द- *श्रद्धांजलि सुमन*


तीजन बाई जनम धरे जी, जिला दुर्ग गनियारी गाँव।

सुना महाभारत के गाथा, दया-मया के पाइस छाँव।।


तेरह बछर उमरिया मा ही, पहिली बेर मंच मा आय।

धरे पंडवानी के बाना, लिये तमूरा हाथ बजाय।।


बइठे-बइठे गांय सबो ता, तीजन ठाढ़े सुर ला तान।

कभू धनुष ता कभू गदा के, लिये तमूरा बाना जान।।


कड़क अवाज सुनावत जग ला, दुस्सासन के छाती चीर।

करिस परख हीरा के संगी, गुरु तनवीर गुनी गंभीर।।


देश-विदेश म डंका बाजिस, सत्रह देश करे परनाम।

पद्मश्री अऊ पद्मविभूषण, दुनिया जानय तीजन नाम।।


पाँच जुलाई एम्स रायपुर, मा तीजन के छूटिस प्रान।

छत्तीसगढ़ के कंठ सिरागे, रोवत हावय आज जहान।।


लोक कला के सुरुज भुतागे, आँखी मा हे आँसू आय।

अमर रही तीजन बाई हा, जुग-जुग तोर सुजस जग गाय।।


✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 05/07/2026

विषय-- आवव अइसन गीत लिखन

 गीत 

मात्रा--16--14

विषय-- आवव अइसन गीत लिखन 


मन मानस के द्वार खोल दे,

आवव अइसन गीत लिखन।

जेला सुनके हिरदे झूमय, 

दया मया संगीत लिखन। ।


जिनगी मा संघर्ष भरे अब,

कइसे अजब जमाना हे ।

आज इहाँ अउ काली ऊँहाँ,

ककरो नहीं ठिकाना हे।।

उरभट रद्दा पाट-पाट के, 

ये भुइँया बर प्रीत लिखन। 

मन मानस के द्वार खोल दे। 

आवव अइसन गीत लिखन। ।


भेद-भाव मा भरगे दुनिया, 

बिन सुर राग अलापत हे।

अपने धुन मा मस्त हवय सब,

देखत बड़ा बियापत हे। ।

रहय धरोहर हिरदे भीतर, 

हर मनखे मन मीत लिखन। 

मन मानस के द्वार खोल दे, 

आवव अइसन गीत लिखन। ।


मनखे-मनखे एक बरोबर, 

संदेश हवय भुइँया के। 

दया धरम अउ मीत मितानी,

पहिचान हवय गुइँया के। ।

पबरित होवय सबके अंतस, 

ज्ञान भरे सब रीत लिखन। 

मन मानस के द्वार खोल दे, 

आवव अइसन गीत लिखन। 


सुमित्रा शिशिर

गणात्मक दोहा*

 *गणात्मक दोहा*

18/06/2026



*यगण (122)- *(सृजन शब्द-- नवेली)* 4 बार

नार नवेली रात के, चले सहेली संग।

हँसी ठिठोली गोठ मा, बहुत बिखेरे रंग।।


*मगण (222)-*

घर चौबारा देख लव, कर  पैबारा गोठ।

ये दूराहा प्रेम ला, आजादी दे पोठ।।


*तगण (221)-*

दुखिया ला तत्काल ही, मिलै नहीं आधार।

दुश्मन ये संसार मा, झूठ भरे बाजार।।


*रगण (212)-*

छंद के छ हे गीतिका, मिलै रीतिका ज्ञान।

उज्जर मन मा शोभते, करै साधिका ध्यान।।


*जगण (121)-*

देखव मया दुकान मा, का गरीब के मोल।

देशी सबो समान हे, हमला कहय अमोल।।


सुमित्रा शिशिर

बरखा

 ‎‎‎आजा बरखा रानी* (चौपाई छंद)

‎आजा-आजा बरखा रानी।

‎इहाँ गिरादे झटकुन पानी।।

‎सुरुज देव आगी फेंकत हे।

‎हरर हरर सब ला सेंकत हे।।

‎घाम जनावत हावय भारी।

‎लू मा उपजत हे बीमारी।।

‎तरिया नदिया सबो अँटागे।

‎कुँआ बावली सबो सुखागे।।

‎सुख्खा के आगी तड़पावत।

‎हैंडपंप घलो लड़खड़ावत।।

‎टैंकर आगू नाच लगावत।  

‎पानी बर रोजे कल्लावत।।  

‎बोरवेल के मोटर हाँफय।

‎पानी बिन मशीन हा काँपय।।

‎नल-जल के पाइप रोवत हे।

‎पेड़ काट मनखे सोवत हे।।

‎छोड़व बरखा आना-कानी।

‎तरसत हावँय सबो परानी।।

‎दिखही कब ये बदरी कारी।

‎आही कब तोर इहाँ बारी।।

‎आजा कँसके मार झकोरा।

‎हावँय सब ला तोर अगोरा।।

‎फेर मया बरखा बरसादे।

‎कारी-कारी बदरी ला दे।।

‎टर्र मेचका राग सुनाही। 

‎खेती खार फेर हरियाही।।

‎तरिया नदिया उफान मारे।  

‎दाई आँखी अँसुवन ढारे।।

‎रचनाकार-हेमलाल साहू

‎गाँव - गिधवा, जिला - बेमेतरा 

चौपई छन्द- *बरसात*

 चौपई छन्द- *बरसात*


तक-तक अम्बर नैना हार। कर दौ बादर अब उपकार।।

सुखगे धरती मरत पियास। बइठे हवॅंय किसान उदास।।


अँगरा कस बरसत हे घाम। रुकगे हे सब खेती काम।।

फटगे भुइॅंया छागे त्रास। टूटत हावय मन के आस।।


भूख पियासे लइका आज। बढ़गे करजा बढ़गे ब्याज।।

सुक्खा अँगना दिखे बिरान। कब आही सुख धरे बिहान।।


जइसे चातक रोवय रात। कब होही कहिके बरसात।।

तइसे तरसत हवॅंय किसान। बोयें बर धनहा मा धान।।


घूमड़-घूमड़ बस करथस शोर। फेर न होवय दर्शन तोर।

करिया बादर अब तो आव। ये जियरा ला मोर जुड़ाव।।


बरसव झमझम धरके धार। मिट जावय दुख हाहाकार।।

अमरित बरसा कर दौ दान। तभे बाॅंचही सबके प्रान।।


✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध" 

बिलासपुर (छत्तीसगढ़)20/06/2026

21 जून अंतरास्ट्रीय योग दिवस पर...... रोला छंद- *योग*

 21 जून अंतरास्ट्रीय योग दिवस पर......


 रोला छंद- *योग*


योग करव सब लोग, योग ले मन हरसाथे।

दूर भगय सब रोग, देह सुग्घर खिल जाथे।।

मन मा भरत उमंग, शक्ति के स्रोत जगाथे।

रहिथे स्वस्थ शरीर, कष्ट तुरते दुरिहाथे।।


चिंता मिटय तमाम, योग मा जब मन लागे।

नइ भटकय जी ध्यान, चेतना भीतर जागे।।

प्राणायाम अनूप, श्वास के गति ला साधे।

मिटे सकल संताप, कभू नइ रोग बियाधे।।


इक्किस जून महान, दिवस ये मंगलकारी।

गूँजत हे सब ओर, योग के महिमा न्यारी।।

नमन करय सब देश, ज्ञान भारत हा पाये।

काया रखे निरोग, मंत्र सब हें अपनाये।।


आवव मिलके आज, प्रतिज्ञा मन मा धारिन।

करबो निशदिन योग, प्रदूषण मन के मारिन।।

स्वस्थ बनय ये देश, इही हे असली पूजा।

योग सरीखे मीत, न जग मा कोई दूजा।।


सिर्फ क्रिया ना योग, कर्म के सीख सिखाथे।

समता के ये भाव, सरी दुनिया मा लाथे।।

योग करे ले लोग, बरस सौ ऊपर जीथें।

गजानंद आनंद, धरे सुख रस ला पीथें।।


✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़)21/06/2026

मानसून के अगोरा*

 *मानसून के अगोरा*


मान बात अउ सुन अरजी ला, मानसून महराज।

तोर अगोरा अरझे हावय, जग के जम्मो काज।।

नदियाँ तरिया हर डबकत हे, सुक्खा परगे खार।

फटत करेजा हर भुइँया के, कर दे तैं उपकार।

तालाबेली करत जीव मन,  जमके बरसव आज।।

मान बात अउ सुन अरजी ला...........


पंखा कूलर हफरत अड़बड़, एसी होगे फेल।

तोर बिना सब ठलहा बइठे, तीरी पासा खेल।

बोरे बासी गजब सुहाथे, चटनी संग पियाज।।

मान बात अउ सुन अरजी ला............


बिसा डरे हँव खातू बिजहा, दवई घलो उधार।

माढ़े मूड़ पउँर के करजा, हावय असो करार।

साहूकार के चुकता करहूँ, गिरही नइ ते गाज।।

मान बात अउ सुन अरजी ला..........


तोर आसरा हावन जम्मो, मालिक अउ बनिहार।

घर मा बाढ़े बेटी हावय, दाई परे बिमार।

खेती ले सब आस हमर हे, रखबे तैंहर लाज।।

मान बात अउ सुन अरजी ला...........


काँटा खूँटी लेस डरे हन, जोहत रस्ता तोर,

धरती माँ के प्यास बुझादे, कसके पानी झोर,

कान सुने खातिर तरसत हे, घड़-घड़ के आवाज।।

मान बात अउ सुन अरजी ला, मानसून महराज।

तोर अगोरा अरझे हावय,जग के जम्मो काज।।


                     🙏🙏🙏🙏

              नारायण प्रसाद वर्मा "चंदन"

            ढ़ाबा-भिंभौरी, बेमेतरा(छ.ग.)

                    7354958844

कसके बने दमोर

 सरसी - छंद 

विधान – 16 - 11 

डाड़ – 2 / चरण चार


कसके बने दमोर


सब ला तोरे हवय सहारा, धुर्रा उड़गे खोर । 

तरिया नदिया घलो सुखागे, सुक्खा परगे बोर ।।

लगगे अब चौमासा भगवन, अब तो पानी झोर । 

नाँगर बइला घलो निकलही, कसके बने दमोर ॥


गरमी ले अब प्रान छुट्त हे, लाइन होथे गोल । 

आँधी अंधड़ चलथे भारी, टूटत हावय पोल ॥ 

गिर जा पानी झन तरसा तैं, जादा नइ तो थोर । 

नाँगर बइला घलो निकलही,  कसके बने दमोर ।।


तीपत लकलक चारों कोती, देखव आके हाल । 

सब के मालिक एक तहीं हस, भर दे नदिया ताल।।  

तरतर-तरतर चुहत पसीना, चट चट जरथे खोर । 

नाँगर बइला घलो निकलही,  कसके बने दमोर ।।


कमलेश प्रसाद शर्माबाबू 

 कटंगी-गंडई जिला केसीजी छत्तीसगढ़