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Monday, May 4, 2026

चकोर सवैया -"बनिहार के दिन"

 चकोर सवैया -"बनिहार के दिन"

एक मई गुण गावव आवव‌ देवव ये मजदूर ल मान।

ये जग मा जतका गढ़ना गढ़थे सुरता कर लौ गुणगान।।

जाँगर टोर कमावत हें जिनगी भर छाँव न हे पहिचान।

दूसर ला महला मँजला अपने घर छावत झोपड़ तान।।


झेलत हावँव जी दुख हार न मानत जींयत खावत जाँव।

खोजत जाथँव आस लगावत आज भला मिलही ग थिराँव।।

पेलत जाथँव घात पछेलत भोगत रोवत फेर मनाँव।

होवत देख खुवार खड़े मन मा बनिहार हरौं पछताँव।।


हाँसत गावत बीतत जावत हे जिनगी अब सुग्घर मोर।

चार सखा मन संग बितावत बाँटत लेवत जाँव अँजोर।।

पाथँव प्रेम पिरीत सबो मन ले बिसराथँव पीर बटोर।

तीरथ मोर हरे गँवई सगरो बर राहय गंग चिभोर।।


द्रोपती साहू "सरसिज"

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