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Monday, May 4, 2026

आल्हा छंद- *मजदूर*

 आज एक मई मजदूर दिवस मा मजदूर भाई मन ला सादर समर्पित-


 आल्हा छंद- *मजदूर*


जेखर खून पसीना ले ये, धरती चमके सोन समान।

उड़े मेहनत के खुशबू हा, बनके जग जन बर वरदान।।


जेखर दम ले दुनिया चलथे, सदा ओखरे जय-जयकार।

माथ नवाँ के गजानंद जी, करय नमन नित सौ-सौ बार।।


बड़े-बड़े घर महल अटारी, सिरजाये जे खुद के हाथ।

खेल बिधाता तोर गजब हे, आज उही हे देख अनाथ।।


लोहा काट बनावय रद्दा, देवय बज्जर फोड़ पहाड़।

नवजुग के बन इही रचयिता, भरथे शेर समान दहाड़।।


माटी सॅंग माटी हो जाथे, तब जाके उपजाथे अन्न।

भारत भुइॅंया के सेवा कर, रहिथे जी मजदूर प्रसन्न।।


भीख काखरो ले नइ माँगय, नइ तो हाथ कभू फइलाय।

अपन पसीना करम कमाई, के दम मा घर द्वार चलाय।।


कोनों छोटे बड़े नहीं हे, श्रम हा सब ले बड़े प्रधान।

सुन संगी मजदूर बचाथे, हमर देश के ऊँच मियान।।


आज मई के पहिली तारिख, आवव गढ़बो नवा सुराज।

हक अधिकार दिलाये खातिर, करबो मिलके संगी काज।।


न्याय मिलय सम्मान मिलय अउ, सबो हाथ मा राहय काम।

मजदूर हवय आधार जगत के, उॅंखर बदौलत हे सुख धाम।।


✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 01/05/2026

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