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Saturday, March 24, 2018

ताटंक छंद - श्री चोवा राम " बादल "

श्री राम जनम  -

लछमीपति ला नरतन धरके, लीला अपन रचाना हे।
पापी मन ला मार मिटा के, धरम धजा फहराना हे । 1।

मनु सतरूपा राजा रानी, करे रहिंन तप जी भारी।
देये वरदान निभाये के, आगे हावय गा पारी। 2।

नारद मुनि के श्राप घलो हे, राम जनम लिस त्रेता में।
धरती हाहा कार करिस जब, परके पाप सपेटा में ।3।

देव संत तपसी मनखे के,  सब दुख दरद मिटाना हे ।
धरम करम भूले बिसरे ला, फरी फरी समझाना हे । 4।

रावन कुंभकरन दूनो के, पार उतारे के बारी।
सनक सनंदन सनकादिक के, श्राप लगे हे जी भारी । 5।

राम जनम के कतको कारन , बेद पुरान बखाने हे ।
मोर छोटकुन अड़हा मति हा, अतके कस ला जाने हे ।6 ।

सुभ मुहरत अभिजित के हावय, करक लगन सुभकारी हे ।
हवय नछत्तर सुग्घर छाहित , नव ग्रह मन सँगवारी हे ।7।

समे दोपहर दिन के हावय , बढ़िया बेरा आये हे ।
जान समय अवतार नाथ के, देव सबो सकलाये हे । 8।

फुरहुर फुरहुर हवा चलत हे, जंगल सब हरियाये हें
परबत मन चमकत हावय जी, रतन अपन बगराये हें । 9 ।

कलकल कलकल गीत सुनावत , बोहावत नदिया धारा ।
कुहुक कोयली राग धरे हे , मस्त मगन भौंरा न्यारा । 10 ।

डार डार मा फूल लदे हे, रितु मनभावन होगे हे ।
श्री हरि जी हा इही समे ला , जनम धरे बर जोंगे हे ।11।

माता कौशिलिया के आगू , चार भुजा वाला ठाढ़े ।
माता अड़बड़ गदगद होगे, देखत अचरज हे बाढ़े । 12।

कोदो साँवर तन हा सुंदर ,मुँह के सोभा भारी हे ।
फूल खोखमा कस आँखी मा, पुतरी भँवरी कारी हे । 13।

गदा शंख ला धरे हवय वो , चक्र सुदर्शन हे धारी ।
रतन जड़े गहना पहिरे हे, चमकत हावय जी भारी । 14 ।

मूड़ सोन के मुकुट बिराजे, कानन कुंडल सोहे हे ।
बैजंती माला बड़ सुग्घर , तीन लोक मन मोंहे हे ।15 ।

घुँघरालू करिया चूंदी हा , बादर सहीं उनोये हे ।
अगर चँदन के तिलक लगे हे , माथा अबड़ फबोये हे ।16 ।

धोती पिंयर हवय पहिरे जी, पीताम्बर अलफी डारे ।
अदभुत रूप हवय श्री हरि के, सुंदरता लहरा मारे ।17।

बिनती करत कहिस माता हा, लइ का बनके आना तैं ।
मोर कोंख के बेटा बनके , सिसु लीला देखाना तैं ।।18।

तुरते प्रभु हा लइका बनगे , भुलवारे मति माता के ।
एहों एहों रोवन लागिस , देखव खेल बिधाता के । 19।

अवधपुरी मा मंगल होगे , बाजत हावय जी बाजा ।
हीरा मोती दान करत हे, अब्बड़ खुस दशरथ राजा । 20।

रचनाकार - श्री चोवा राम " बादल "
                हथबन्द, छत्तीसगढ़