पुन्नी के चंदा हर,बरय अंजोर ।
नाचत देखय ओला,आज चकोर ।।
करे सिंगार सोला,चंदा आय ।
जेहर देखय ओला,मन ला भाय।।
अमरित लेके चंदा,बरसे आय ।
छानी परवा दाई,खीर मढ़ाय ।।
ओरमे धान बाली,अमरित पाय ।
पुन्नी शरद म सुघ्घर, रात नहाय ।।
भुइयाँ महतारी के ,पाँव पखार ।
आगे बेटी लछमी,घरे हमार ।।
रचनाकार - श्रीमती वसंती वर्मा
बिलासपुर, छत्तीसगढ़
नाचत देखय ओला,आज चकोर ।।
करे सिंगार सोला,चंदा आय ।
जेहर देखय ओला,मन ला भाय।।
अमरित लेके चंदा,बरसे आय ।
छानी परवा दाई,खीर मढ़ाय ।।
ओरमे धान बाली,अमरित पाय ।
पुन्नी शरद म सुघ्घर, रात नहाय ।।
भुइयाँ महतारी के ,पाँव पखार ।
आगे बेटी लछमी,घरे हमार ।।
रचनाकार - श्रीमती वसंती वर्मा
बिलासपुर, छत्तीसगढ़