Wednesday, November 22, 2017

सार-छंद - श्री अतनु जोगी

सार नाम के बाँधे गठरी,
तेने लखही भाई !
अाने ताने भज के मैना,
कोड़ै खुद बर खाई !!

अंत्ते तंत्ते देखत नैना,
लाहो लेथच काहे !
सत्तनाम रे ! अंत्तस साखी,
लबरा होगय काहे !!

साध-साध में कोनो जाही,
रस्ता संकट छाये !
साधे साधक तब तो पाही,
नइते रोवत आये !!

रूप रंग के नोहय रस्ता,
माया कपटी होथे !
कंचन काया साधक तोरे,
साधे जस ला धोथे !!

जपव नाम रे निरगुन मनवा,
ओही पार लगाही !
जगत भगत तो राखे साँई,
सतगुरु आज लखाही !!

रचनाकार -  श्री अतनु जोगी
छत्तीसगढ़

22 comments:

  1. सुग्घर सार छंद अतनु भाई

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    1. बहुँत बहुँत धन्यवाद भईया जी

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  2. बहुत सुग्घर सार छंद ,अतनु भैया।बधाई अउ शुभकामना।

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    1. बहुँत बहुँत धन्यवाद भईया जी

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    1. बहुँत बहुँत धन्यवाद भईया जी

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  4. बहुतेच सुग्घर सार छंद बर अतनु जी ला हार्दिक बधाई।

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    1. बहुँत बहुँत धन्यवाद भईया जी

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  5. बहुत बढ़िया है अतनुभाई सार छंद सृजन

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    1. बहुँत बहुँत धन्यवाद दीदी जी

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  6. छत्तीसगढिया सबले - बढ़िया, नोनी के मरना ए
    सज्जनता हर कमजोरी ए, शकुन देख गहना ए।

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    1. आपमन के आसिस अउ मया अइसने मिलत रहै आदरणीय दीदी जी

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  7. वाह्ह् शानदार सार छंद हे आसकरण जी।

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    1. बहुँत बहुँत धन्यवाद भईया जी

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  8. शानदार सार छंद मा रचना लिखे हव सर।सादर बधाई

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  9. शानदार सार छंद मा रचना लिखे हव सर।सादर बधाई

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    1. बहुँत बहुँत धन्यवाद भईया जी

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    2. बहुँत बहुँत धन्यवाद भईया जी

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  10. आदरणीय पूज्य गुरुदेव निगम जी ल बहुँत बहुँत धन्यवाद 🙏

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  11. आदरणीय पूज्य गुरुदेव निगम जी ल बहुँत बहुँत धन्यवाद 🙏

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  12. बहुत सुघ्घर सार छंद सिरजाये हवव अतनु भाई।। बधाई।।

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