Sunday, January 21, 2018

बरवै छंद - श्रीमती वसंती वर्मा

पुन्नी के चंदा हर,बरय अंजोर ।
नाचत देखय ओला,आज चकोर ।।

करे सिंगार सोला,चंदा आय ।
जेहर देखय ओला,मन ला भाय।।

अमरित लेके चंदा,बरसे आय ।
छानी परवा दाई,खीर मढ़ाय ।।

ओरमे धान बाली,अमरित पाय ।
पुन्नी शरद म सुघ्घर, रात नहाय ।।

भुइयाँ महतारी के ,पाँव पखार ।
आगे बेटी लछमी,घरे हमार  ।।

रचनाकार  - श्रीमती वसंती वर्मा
बिलासपुर, छत्तीसगढ़


14 comments:

  1. वाह दीदी बहुत सुन्दर

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  2. बहुत सुघ्घऱ दीदी

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  3. पुन्नी के चंदा के महिमा तोर।
    पढ़त मोहा गय मन ह दीदी मोर।।

    सादर बधाई दीदी....

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  4. वाहःहः बहुत बढ़िया दीदी बरवै छंद म पुन्नी चंदा के बखान।

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  5. आपमन ला गाड़ा गाड़ा बधाई आदरणीया।

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  6. बहुत सुग्घर रचना हे दीदी। बधाई अउ शुभकामना।

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  7. बहुत सुग्धर रचना बर आप ल बधाई दीदी

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  8. लाजवाब रचना दीदी।सादर बधाई

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  9. लाजवाब रचना दीदी।सादर बधाई

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  10. सब्बो भाई बहिनी मनला सादर धन्यवाद मोर रचना ला सहराय हव तेकर बर

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  11. शानदार बरवै चन्द सृजन बर बसंती वर्मा जी ला हार्दिक शुभकामना।

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  12. बाबा रामदेव के, देख - दुकान
    चलौ हमूँ बिसातेन, थोरिक धान।

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  13. बधाई हो दीदी जी बहुँत बढ़िया

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  14. बधाई हो दीदी जी बहुँत बढ़िया

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