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Sunday, August 9, 2026

रिमझिम-रिमझिम-रिमझिम पानी

 ताटंक छन्द गीत

रिमझिम-रिमझिम-रिमझिम पानी


तरिया-नदिया मन भर जाथें, भुइयाँ हा हरियाथे जी ।

रिमझिम-रिमझिम-रिमझिम पानी, सबके मन ला भाथे जी ॥


बिजली चमकय बादर गरजय, इंदर दागय गोली ला ।

बड़ उपकारी हावय देवा, भर देवय नित झोली ला ॥


नइ राहय आगी कस गरमी, बरसा देख जुड़ाथे जी ।

रिमझिम-रिमझिम-रिमझिम पानी, सबके मन ला भाथे जी ॥


नाँगर-बइला धरे किसनहा, जावय बहरा डोली मा ।

मोर-पपीहा झूमँय-नाचँय, मया भरँय हमजोली मा ॥


ये पानी ले सुग्घर जिनगी, सुख-सुविधा घर आथे जी ।

रिमझिम-रिमझिम-रिमझिम पानी, सबके मन ला भाथे जी ॥


सुवा-ददरिया-करमा गावँय, नर-नारी के टोली हा ।

अन्तस के पीरा हर लेवँय, हँसी-ठिठोली बोली हा ॥


सावन-भादो-क्वाँर महीना, चउमासा कहलाथे जी ।

रिमझिम-रिमझिम-रिमझिम पानी, सबके मन ला भाथे जी ॥


ओम प्रकाश पात्रे 'ओम'

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