ताटंक छन्द गीत
रिमझिम-रिमझिम-रिमझिम पानी
तरिया-नदिया मन भर जाथें, भुइयाँ हा हरियाथे जी ।
रिमझिम-रिमझिम-रिमझिम पानी, सबके मन ला भाथे जी ॥
बिजली चमकय बादर गरजय, इंदर दागय गोली ला ।
बड़ उपकारी हावय देवा, भर देवय नित झोली ला ॥
नइ राहय आगी कस गरमी, बरसा देख जुड़ाथे जी ।
रिमझिम-रिमझिम-रिमझिम पानी, सबके मन ला भाथे जी ॥
नाँगर-बइला धरे किसनहा, जावय बहरा डोली मा ।
मोर-पपीहा झूमँय-नाचँय, मया भरँय हमजोली मा ॥
ये पानी ले सुग्घर जिनगी, सुख-सुविधा घर आथे जी ।
रिमझिम-रिमझिम-रिमझिम पानी, सबके मन ला भाथे जी ॥
सुवा-ददरिया-करमा गावँय, नर-नारी के टोली हा ।
अन्तस के पीरा हर लेवँय, हँसी-ठिठोली बोली हा ॥
सावन-भादो-क्वाँर महीना, चउमासा कहलाथे जी ।
रिमझिम-रिमझिम-रिमझिम पानी, सबके मन ला भाथे जी ॥
ओम प्रकाश पात्रे 'ओम'
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