रोला-छंद
छत्तीसगढ़ी लोकगीत के गौरव
1-
रामचंद जी नाम, सुनव सब छत्तिसगढ़िया ।
लोकमंच हे देन , चंँदैनी गोंदा बढ़िया ॥
राहय साव खुमान, धरै संगीत ल सुर मा ।
जम जावय सुरताल, धूम मातै रइपुर मा ।।
2-
जनकवि कोदूराम, रचै माटी के गाना ।
सुन के लागय गाँव, हवै जी कतिक सुहाना ।।
मस्तुरिया के गीत, जीत लेथय जनमन ला ।
करथे भाव विभोर, सुहाथे जी जन- जन ला।।
3-
कौशल भाइ मुकुंद, लिखै बड़ रचना सुघ्घर ।
दानेश्वर जी गीत, रचै बड़ उज्जर-उज्जर ॥
चंद्राकर जी प्रेम, गिरीवर लिखथें गाना।
छत्तिसगढ़ के सौंध, रिथे सब ताना-बाना ॥
4-
नारायण परमार, लिखै जीवन यदु रचना ।
धनहा खेती खार, पेड़ अउ माटी पखना ॥
रामेश्वर के लेख, सुहाथे सब ला भारी ।
बद्री लाल विशाल, नरेन्द सबो संँगवारी ॥
5-
दूधमोंगरा के नाम, सुनत मन हा ममहाथे।
मास्टर पीसी लाल, जनक जेखर कहलाथे।।
गायक रचनाकार, कलम मा ताकत भारी।
लिखथें बढ़िया शोध, पढ़ै जी सब नर नारी ।।
6-
गायक जब केदार, उठै सब के मन मोहय ।
जब-जब गावय गीत, कंठ मा मदरस पोहय ॥
परस जवाहर लाल, पवन अउ नवल ह गावय ।
लगय कृष्ण ब्रजधाम, बाँसुरी मधुर सुनावय।
7-
पंचराम के गान, संग मा जनता बाचैं ।
बैतल थिरके मंच, झूम के लोगन नाचैं।।
गजानंद अनुराग, तान मा सुघ्घर गाथें ।
बिंदु खुशी जी दास, गजब के लय लहराथें ।।
8-
दुखिया धुरवा राम, बटोरँय कसके ताली ।
ममता जब जब गाँय, मंच नइ राहय खाली ॥
बासंती देवार, कंठ सरस्वती बिराजै।
गावय पुनम विराट, आँख मा आँसू साजै ॥
9-
गायक गौतम चंद, कान मा मदरस घोलय।
कविता के आवाज, खनक जस मयना बोलय ।।
लता खापर्डे गाँय, लगै कोयल के बानी ।
सफरी गीत सुनाय, करेजा होवय चानी ॥
10-
आवय भैया लाल, मंच मा गदर मचावँय ।
हेड़ाऊ जी और, कहत जनता चिल्लावँय ॥
हिरवानी महदेव, बाँध के सुर ला साजँय ।
गोरे बर्मन गाँय, सुनत जनता पगलावंँय ।।
11-
प्रीतम झल्लूराम, द्वारिका गावंँय बढ़िया ।
लागय सुघ्घर नीक, मदन जी छत्तिसगढ़िया ।।
मंसूरी संतोष, कुलेश्वर हा जब गावँय ।
सुन लेवन इक बार, कान मा उही सुनावँय ।।
12-
गावय शेख हुसैंन, बढ़े दिल के बड़ धड़कन ।
सुनन भगत के गीत, दही बासी हम झड़कन ॥
माधव जी जब गाँय, गाँव के दरशन होवय ।
ललिता गीत सुनाय, प्रेमिका मन-मन रोवय ।।
13-
आशा येलिस जान, साधना संग जयंती ।
गावय गंगादास, अनचुरी अउ कुलवंती ||
अलका कंचन गाँय, निर्मला कंठ सुहावय ।
चतुर कांति के गीत, शैल छाया मन भावय ॥
14-
ज्योती सुघ्घर मीठ, सरसती गावय करमा ।
सीमा गावय गीत, गूँजै सब के घर-घर मा ।।
रेखा रजनी संग, सुमित्रा गुरुतुर बोली।
साधराम के शोर, कुवाँरा लागय भोली ।।
15-
सुर मा राजकुमार, रामनारायण बानी ।
गयाराज के बोल, आँख मा लावय पानी ।।
रविशंकर सुरेन्द्र, संजना स्वर के ग्यानी ।
दीपक लालू गाँय , चढ़े सब लोग जुबानी ।।
16-
मुरली जी मन भाय, कुसुम ठाकुर अउ बरसन ।
महासिंग के बोल, सुने बर हम सब तरसन ।।
ननकी अउ मिथलेश, झुमुक झमकावय गाना ।
अउ किस्मत देवार, छेड़ दंँय नवा तराना ।।
17-
चिन्ता गंगाराम, नायडू सुर बड़ भाँजय ।
भुलुवा न्यायिक दास, गीत ला झाँझी माँजय ।।
सुशील सीताराम, कलम के गजब सिपाही ।
हरिठाकुर के गीत, सबो के मन ला भाही ॥
18-
नीता गीता भट्ट, फरीदा अउ सुरिखयारिन ।
गावंँय बढ़िया गीत, मया के गठिया पारिन ।।
सावित्री के गान, सुचित्रा स्वर फरियावय ।
अनुसुइया मन भाय, इंदिरा तान लमावय ॥
19-
नील कमल लहराय, किरण शरमा सुर मीठी ।
स्वर्णा गरिमा गाँय, रुकय नइ कखरो सीटी ॥
पदमा पायल तान, छेड़ के गावंँय गाना ।
पुष्प लता नेताम, कंठ बड़ लगै सुहाना ।।
20-
फिरतु विष्णु अउ हेम, गजब के हावय मोती ।
लिखे भगवती गीत, सुनय सब चारों कोती ।।
मीनाक्षी मन जीत, दीप माला के गाना ।
गावय गजब विवेक, झुमैं सब लोग दिवाना।।
21 -
गावंँय राम प्रसाद,अंजली शुक्ला सविता ।
लक्ष्मी सालिक राम, सुहावय सपना कविता ।।
बिमला मुन्ना पाल, त्रिवेणी गावँय बढ़िया।
मेरी डिमान गाँय, चमन के लागय पुड़िया।
22-
सुघ्घर लागय बोल, उदल गीता ध्रुव मथुरा ।
केशव सुनिता संग, उत्तरा गावँय गजरा ॥
सोनी जी घनश्याम, माधुरी नत्थू तोड़े ।
जीवन तीरथ राम, जानकी सुर बड़ छोड़े ।।
23-
जय प्रकाश गजराज, शारदा बढ़िया गाथें ।
तुलसी गोराचंद, बखत मा सुरता आथें ।
मधु मेहत्तर राम, केशरी गौरी नीका ।
अनिता तोरणलाल, बिना सब लागय फीका ।।
24-
पदम मदन चौहान, अजय जलक्षत्री रेखा ।
सुर ला भाजँय खूब, करँव मैं कइसे लेखा ।।
खोमचंद थनवार, मालती छाँया माया ।
सुघ्घर गावँय गीत, हिलोरय मन अउ काया ।।
25-
पीलू रामाधार, सुशीला गावय ठमकय ।
अउ सुनील बंसोड़, धरे माइक ला बमकय ॥
भरय जोश दुष्यंत, गिरी नारायण बाबा ।
शशि नरेश झम गीत, लगै बड़ नावा-नावा ॥
26-
रामशरण सुर साज, नर्मदा गाय ददरिया ।
पिताम्बर के संग, गाँय कमला हा बढ़िया ।।
चंदराम के गान, मधुलिका तुलसी गावय ।
कौशल उरमी संग, दलेश्वर के सुर भावय ॥
27-
दुकालु जस सम्राट, कारतिक के जस गाना ।
चढ़ै देवता लोग, मँगै नरियर अउ बाना ।।
जस गावय शहनाज, भकाभक देवन उनडंँय ।
दिलिप षडंगी मंत्र, पढ़ै देबी मन घुनडँय।।
28-
तीजन झाडूराम, पंडवानी के नायक ।
सुरुज उषा प्रहलाद, रीतु पूना बड़ गायक।।
मानदास के गीत, फिदा रेखा मन मोहय ।
देवदास इक नाम, नचावत पंथी सोहय ।।
29-
शिव सुनील राकेश, अनुज के जादू भारी।
रचना रचै मिनेश, सुनै मिलजुल सँगवारी ।।
चम्पा मोना सेन, अनुपमा गावय जमके ।
आरु स्वेच्छा आज, कनक तारा कस चमके ।।
30-
राहय बढ़िया राज , रेडियो घर-घर बाजय।
नवा बहुरिया रोज, सुनत पैरी ला माँजय ॥
भक्ति गीत के संग, सबेरा सबके होवय ।
जागंँय ओखर संग, ओखरे संग म सोवंँय।।
31-
बाबू के चौपाल, दाइ के हे घर आँगन ।
लइका किसलय बाल, सुनय जे हे मनभावन ॥
बहिनी बिंदिया भाय, कहानी सुनथे बाई |
जोहत रहिथे राह, फोन फरमाइश भाई ।।
32-
युववाणी के गोठ, हमू मन उही म आथन ।
आथे भुइँया गोठ, सुने बर हम डट जाथन ।।
कवि लेखक के बात, सुने बर बढ़िया मिलथे ।
सुघ्घर-सुघ्घर गोठ, कमल तरिया कस खिलथे ॥
33-
आज-काल के गीत, लजावंँय लोगन सुन के ।
फुहड़ता भरमार, भरे हे जी चुन चुन के।।
मिट जाही संस्कार, बनाहीं अइसन गाना ।
"शर्मा बाबू” रोय, आँख हो झन बन काना ॥
कमलेश प्रसाद शर्माबाबू
कटंगी-गंडई जिला केसीजी
छत्तीसगढ़ 491888
साधक सत्र -20
प्रकाशनाधिन संकलन-छंद च्यवनप्राश
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