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Sunday, August 9, 2026

रोला-छंद

 रोला-छंद 


छत्तीसगढ़ी लोकगीत के गौरव

1- 

रामचंद जी नाम, सुनव सब छत्तिसगढ़िया । 

लोकमंच हे देन ,  चंँदैनी गोंदा बढ़ि‌या ॥ 

राहय साव खुमान, धरै संगीत ल सुर मा । 

जम जावय सुरताल, धूम मातै रइपुर मा ।।

2-

जनकवि कोदूराम, रचै माटी के गाना । 

सुन के लागय गाँव, हवै जी कतिक सुहाना ।। 

मस्तुरिया के गीत, जीत लेथय जनमन ला । 

करथे भाव विभोर, सुहाथे जी जन- जन ला।।

3-

कौशल भाइ मुकुंद, लिखै बड़ रचना सुघ्घर । 

दानेश्वर जी गीत, रचै बड़ उज्जर-उज्जर ॥ 

चंद्राकर जी प्रेम, गिरीवर लिखथें गाना। 

छत्तिसगढ़ के सौंध, रिथे सब ताना-बाना ॥

4- 

नारायण परमार, लिखै जीवन यदु रचना । 

धनहा खेती खार, पेड़ अउ माटी पखना ॥ 

रामेश्वर के लेख, सुहाथे सब ला भारी । 

बद्री लाल विशाल, नरेन्द सबो संँगवारी ॥

5-

दूधमोंगरा के नाम, सुनत मन हा ममहाथे।

मास्टर पीसी लाल, जनक जेखर कहलाथे।।

गायक रचनाकार, कलम मा ताकत भारी।

लिखथें बढ़िया शोध, पढ़ै जी सब नर नारी ।।

6-

गायक जब केदार, उठै सब के मन मोहय । 

जब-जब गावय गीत, कंठ मा मदरस पोहय ॥ 

परस जवाहर लाल, पवन अउ नवल ह गावय । 

लगय कृष्ण ब्रजधाम, बाँसुरी मधुर सुनावय।

7-

पंचराम के गान, संग मा जनता बाचैं । 

बैतल थिरके मंच, झूम के लोगन नाचैं।।

गजानंद अनुराग, तान मा सुघ्घर गाथें । 

बिंदु खुशी जी दास, गजब के लय लहराथें ।।

8-

दुखिया धुरवा राम, बटोरँय कसके ताली । 

ममता जब जब गाँय, मंच नइ राहय खाली ॥ 

बासंती देवार, कंठ सरस्वती बिराजै। 

गावय पुनम विराट, आँख मा आँसू साजै ॥

9- 

गायक गौतम चंद, कान मा मदरस घोलय।

कविता के आवाज, खनक जस मयना बोलय ।। 

लता खापर्डे गाँय, लगै कोयल के बानी । 

सफरी गीत सुनाय, करेजा होवय चानी ॥

10- 

आवय भैया लाल, मंच मा गदर मचावँय । 

हेड़ाऊ जी और, कहत जनता चिल्लावँय ॥ 

हिरवानी महदेव, बाँध के सुर ला साजँय । 

गोरे बर्मन गाँय, सुनत जनता पगलावंँय ।।

11- 

प्रीतम झल्लूराम, द्वारिका गावंँय बढ़िया ।

लागय सुघ्घर नीक, मदन जी छत्तिसगढ़िया ।। 

मंसूरी संतोष, कुलेश्वर हा जब गावँय । 

सुन लेवन इक बार, कान मा उही सुनावँय ।।

12- 

गावय शेख हुसैंन, बढ़े दिल के बड़‌ धड़कन । 

सुनन भगत के गीत, दही बासी हम झड़कन ॥ 

माधव जी जब गाँय, गाँव के दरशन होवय । 

ललिता गीत सुनाय, प्रेमिका मन-मन रोवय ।।

13-

आशा येलिस जान, साधना संग जयंती । 

गावय गंगादास, अनचुरी अउ कुलवंती || 

अलका कंचन गाँय, निर्मला कंठ सुहावय । 

चतुर कांति के गीत, शैल छाया मन भावय ॥ 

14- 

ज्योती सुघ्घर मीठ, सरसती गावय करमा । 

सीमा गावय गीत, गूँजै सब के घर-घर मा ।। 

रेखा रजनी संग, सुमित्रा गुरुतुर बोली। 

साधराम के शोर, कुवाँरा लागय भोली ।।

15- 

सुर मा राजकुमार, रामनारायण बानी । 

गयाराज के बोल, आँख मा लावय पानी ।। 

रविशंकर सुरेन्द्र, संजना स्वर के ग्यानी । 

दीपक लालू गाँय , चढ़े सब लोग जुबानी ।।

16- 

मुरली जी मन भाय, कुसुम ठाकुर अउ बरसन । 

महासिंग के बोल, सुने बर हम सब तरसन ।।

ननकी अउ मिथलेश, झुमुक झमकावय गाना । 

अउ किस्मत देवार, छेड़ दंँय नवा तराना ।।

17-

चिन्ता गंगाराम, नायडू सुर बड़ भाँजय । 

भुलुवा न्यायिक दास, गीत ला झाँझी माँजय ।। 

सुशील सीताराम, कलम के गजब सिपाही । 

हरिठाकुर के गीत, सबो के मन ला भाही ॥

18- 

नीता गीता भट्ट, फरीदा अउ सुरिखयारिन । 

गावंँय बढ़ि‌या गीत, मया के गठिया पारिन ।। 

सावित्री के गान, सुचित्रा स्वर फरियावय । 

अनुसुइया मन भाय, इंदिरा तान लमावय ॥

19- 

नील कमल लहराय, किरण शरमा सुर मीठी । 

स्वर्णा गरिमा गाँय, रुकय नइ कखरो सीटी ॥ 

पदमा पायल तान, छेड़ के गावंँय गाना । 

पुष्प लता नेताम, कंठ बड़ लगै सुहाना ।।

20-

फिरतु विष्णु अउ हेम, गजब के हावय मोती । 

लिखे भगवती गीत, सुनय सब चारों कोती ।। 

मीनाक्षी मन जीत, दीप माला के गाना । 

गावय गजब विवेक, झुमैं सब लोग दिवाना।।

21 -

गावंँय राम प्रसाद,अंजली शुक्ला सविता । 

लक्ष्मी सालिक राम, सुहावय सपना कविता ।। 

बिमला मुन्ना पाल, त्रिवेणी गावँय  बढ़िया। 

मेरी डिमान गाँय, चमन के लागय पुड़िया।

22- 

सुघ्घर लागय बोल, उदल गीता ध्रुव मथुरा । 

केशव सुनिता संग, उत्तरा गावँय गजरा ॥ 

सोनी जी घनश्याम, माधुरी नत्थू तोड़े । 

जीवन तीरथ राम, जानकी सुर बड़ छोड़े ।।

23- 

जय प्रकाश गजराज, शारदा बढ़िया गाथें । 

तुलसी गोराचंद, बखत मा सुरता आथें । 

मधु मेहत्तर राम, केशरी गौरी नीका । 

अनिता तोरणलाल, बिना सब लागय फीका ।।

24-

पदम मदन चौहान, अजय जलक्षत्री रेखा । 

सुर ला भाजँय खूब, करँव मैं कइसे लेखा ।। 

खोमचंद थनवार, मालती छाँया माया । 

सुघ्घर गावँय गीत, हिलोरय मन अउ काया ।।

25- 

पीलू रामाधार, सुशीला गावय ठमकय । 

अउ सुनील बंसोड़, धरे माइक ला बमकय ॥ 

भरय जोश दुष्यंत, गिरी नारायण बाबा । 

शशि नरेश झम गीत, लगै बड़ नावा-नावा ॥

26- 

रामशरण सुर साज, नर्मदा गाय ददरिया । 

पिताम्बर के संग, गाँय कमला हा बढ़ि‌या ।। 

चंदराम के गान, मधुलिका तुलसी गावय । 

कौशल उरमी संग, दलेश्वर के सुर भावय ॥

27- 

दुकालु जस सम्राट, कारतिक के जस गाना । 

चढ़ै देवता लोग, मँगै नरियर अउ बाना ।। 

जस गावय शहनाज, भकाभक देवन उनडंँय । 

दिलिप षडंगी मंत्र, पढ़ै देबी मन घुनडँय।।

28-

तीजन झाडूराम, पंड‌वानी के नायक । 

सुरुज उषा प्रहलाद, रीतु पूना बड़ गायक।।

मानदास के गीत, फिदा रेखा मन मोहय । 

देवदास इक नाम, नचावत पंथी सोहय ।।

29- 

शिव सुनील राकेश, अनुज के जादू भारी। 

रचना रचै मिनेश, सुनै मिलजुल सँगवारी ।। 

चम्पा मोना सेन, अनुपमा गावय जमके । 

आरु स्वेच्छा आज, कनक तारा कस चमके ।।

30- 

राहय बढ़िया राज , रेडियो घर-घर बाजय।

नवा बहुरिया रोज, सुनत पैरी ला माँजय ॥ 

भक्ति गीत के संग, सबेरा सबके होवय । 

जागंँय ओखर संग, ओखरे संग म सोवंँय।।

31- 

बाबू के चौपाल, दाइ के हे घर आँगन । 

लइका किसलय बाल, सुनय जे हे मनभावन ॥ 

बहिनी बिंदिया भाय, कहानी सुनथे बाई | 

जोहत रहिथे राह, फोन फरमाइश भाई ।।

32-  

युववाणी के गोठ, हमू मन उही म आथन । 

आथे भुइँया गोठ, सुने बर हम डट जाथन ।। 

कवि लेखक के बात, सुने बर बढ़िया मिलथे । 

सुघ्घर-सुघ्घर गोठ, कमल तरिया कस खिलथे ॥

33- 

आज-काल के गीत, लजावंँय लोगन सुन के । 

फुहड़ता भरमार, भरे हे जी चुन चुन के।। 

मिट जाही संस्कार, बनाहीं अइसन गाना । 

"शर्मा बाबू” रोय, आँख हो झन बन काना ॥


कमलेश प्रसाद शर्माबाबू 

कटंगी-गंडई जिला केसीजी 

 छत्तीसगढ़ 491888

साधक सत्र -20

प्रकाशनाधिन संकलन-छंद च्यवनप्राश

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