छ्न्द साधना गुरु हवै, सुग्घर लय संगीत।
अंतस मैल मिटात हे, बना अपन हे मीत।।
गुरु पँवरी मा हे नवा, सदा जोर कर माथ।
बिपत घड़ी मा देत हे, देव हमेशा साथ।।
गुरु के आशीर्वाद ले, जग ला लेवव जीत।
जन जन के मन मा भरौ, गुरुवर के ही गीत।।
कोटि-कोटि कर के जतन, जनम जनम गे बीत।
होय नहीं बिन गुरु कृपा, राम किशन ले प्रीत।।
गुरु के पँवरी मा हवै, जम्मो तीरथ धाम।
जेन भजे इन मन लगा, पावैं खुशी तमाम।।
गुरुवर तारनहार हे, करें सदा भव पार।
नाँव उबारत हे फँसे, बीच नदी मझधार।।
गुरु के पद नख मा हवै, शीतल गंगा नीर।
जिनकर पूजन ध्यान ले, कट जावै दुख पीर।।
कल्प वृक्ष गुरुदेव हे, जानैं मन के बात।
मन इच्छा पूरन करें, देत नवाँ सौगात ।।
मन करथे रहितेंव मँय, गुरुवर के ही ठाँव।
कारज कर हनुमान अस, सेवक मँय बन जाँव।।
तातु राम धीवर
भैंसबोड़ जिला धमतरी
मो. 6267792997
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गुरुदेव के पँवरी मा सादर नमन वंदन हे!
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