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Sunday, August 9, 2026

हरि गीतिका छंद छत्तीसगढ़ के धार्मिक पर्यटन स्थल

 हरि गीतिका छंद 


छत्तीसगढ़ के धार्मिक पर्यटन स्थल


राजिम 

राजिम जिहाँ के धाम हे, बसथे उहाँ भगवान हा।

दरशन हवय वो रूप के, तरथे दुखी धनवान हा ॥


खिचरी लगे हे भोग मा, करमा खवाये हाथ मा ।

पावन त्रिवेणी हे घलो, देखव कुलेश्वर साथ मा॥


डोंगरगढ़ बमलाई

ऊँचा पहाड़ी मा बसे, देखव ग बमलाई सती ।

डोंगर हवै चारों मुड़ा, मैदान हे खाल्हे कती।

मनखे इहाँ सब दूर से, आवत रिथें सब वार मा ।

ज्योती जला वर माँगथें, उन चैत मास कुँवार मा ।।


सिरपुर

सिरपुर चलौ देखव उहाँ, तीरथ बरोबर लागथे ।

लक्ष्मण लला मंदिर हवै, देखत सबो दुख भागथे ।

आवत रिथें भिक्षुक इहाँ, धरमी सबोझन बौध के ।

चारों मुड़ा बिखरे हवय, अवशेष जुन्ना शोध के ।।


चम्पारन

वल्लभ इहाँ के हे गुरु, अउ नाम चम्पारन हवै ।

बड़ दिव्य आलौकिक भरे, ब्रजधाम कस येहा भवै।।

गोठान हे गोलोक कस, गिरिराज के ये धाम हे ।

शिवलिंग बिराजे हे घलो, कतकोन शिव के नाम हे ।।

खल्लारी

हे सीढ़ि‌याँ सुघ्घर बने, सौ आठ आगर साठ हे ।

साक्षात खल्लारी हवै, दुरलभ मनोहर पाठ हे।।

बइठे रिथे दू शेर हा, देखव उहाँ बनवाय हे ।

हे कामना कतको धरे, लोगन उहाँ सब आय हें ।।


घटारानी

देखौ घटा रानी सुघर, जल के बने परपात हे । 

चारों मुड़ा फइले बिकट, जंगल घलो मन भात हे ।।

रद्दा हवै उपर घलो, नीचे बने हे पास मा ।

जनता नँगत आवत रिथें,  दरशन करे के आस मा ।।


भोरमदेव

भोरम हवै बड़ देवता, फइले सघन वन घाँस हे।

लोगन धरे काँवर इहाँ, सावन उहाँ बर खास हे ।।

मंदिर जघा तरिया बने, वोटिंग करैं सब लोग जी ।

भोला दरस बर झूम के, आवत रिथें सब रोज जी ।।


शिवरी नारायण

शिवरी नरायण धाम हे, शबरी खवाइस बेर ला ।

आवत हवै देखत रिहिस, वो देख माया फेर ला।।

पा गे नरायाण के दरस, वो तप जघा अब धाम हे ।

पावन हवै तीरथ बरत, शिवरी नरायण नाम हे ।।


झलमला

बालोद मा चल देख लौ, मंदिर हवै बड़ भव्य जी ।

गंगा झलमला हा फबै, सोहत हवै बड़ दिव्य जी ।।

कैलाश कस भीतर गुफा, मैया रहै जस लोक मा ।

लहरात हे कतको जगह, तैं देख झंडा फोक मा ।।


चंडी माता

चंडी बिराजे हे चलौ, ऊँचा पहाड़ी पाठ मा ।

आवत रिथें दरशक उहाँ, घूँमत रिथें सब घाट मा ।।

वो बागबाहारा बड़ा, जंगल जिहाँ सब आत हें ।

"बाबू” घुँचापाली देखौ, भलुवा प्रसादी खात हें ।।


कमलेश प्रसाद शर्माबाबू 

(साहित्यकार छत्तीसगढ़ी भाषा)

 कटंगी-गंडई जिला केसीजी छत्तीसगढ़ 

छंद साधक -सत्र-20

(छंद के छः)

प्रकाशनाधिन संकलन-छंद च्यवनप्राश

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