Friday, April 20, 2018

भुजंग प्रयात छंद - श्री जीतेंद्र वर्मा "खैरझिटिया"

मदारी -

मदारी  धरे बाँसुरी ला बजावै।
सुनै गाँव वाले सबो दौड़ आवै।
खड़े आदमी हे बना गोल घेरा।
जमूरा  मदारी  लगाये ग फेरा।

हवै बेंदरा  नेवला  साँप  भालू।
करे काम दौड़े जमूरा ग चालू।
बने  नाच  के बेंदरा हा दिखावै।
बजे ताल भालू नरी ला झुलावै।

कहाँ गा पटे नेवला साँप तारी।
लड़ाई  करावै  ग देखौ मदारी।
बजै  ढोल  बाजा लड़े खूब दोनो।
कहाँ साँस ले आदमी देख कोनो।

जमूरा ह हाँसी ठिठोली करे गा।
सबे हाथ ले खूब ताली झरे गा।
जियाँ हा अघाये सबे आदमी के।
उना पेट  ताये  ग  जंजाल जी के।

करे  खेल गाँवे गली मा मदारी।
कभू मान पाये कभू खाय गारी।
चले खेल ले रोज दाना ग पानी।
हरे  खेल  देखौ ग ये जिंदगानी।

जमाना नवा हे नवा खेल छाये।
कहाँ  गा  मदारी जमूरा सुहाये।
गँवागे  मदारी  गँवागे जमूरा।
धरे हाथ मा फोन घूमे ग टूरा।

रचनाकार - श्री जीतेंद्र वर्मा "खैरझिटिया"
बाल्को(कोरबा)
9981441795

20 comments:

  1. बहुत बढ़िया रचना वर्मा जी ।आपके रचना ला पढके हमर गाँव मा मदारी आथे तेकरे सुरता आगे ।बिल्कुल सटीक रचना लिखे हो।
    बहुत बहुत बधाई ।

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  2. वाह बहुत बढ़िया भईया जी बधाई हो

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  3. परम् पूज्य गुरुदेव संग आप सबो ल अन्तस् ले नमन

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  4. मदारी उपर बहुत बढ़िया रचना हे जितेन्द्र जी ।

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  5. वाहःहः भाई जुन्ना मनोरंजन के साधन ला जीवंत करे हव।
    अइसने रचना आने वाले पीढ़ी के लिए उत्सुकता के विषय रहही।
    बहुत बहुत बधाई।

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    1. दीदी,सधन्यवाद,,

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  6. क्या बात है।जबरदस्त रचना वर्माजी । बधाई।

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  7. मन मोहन तुम भूल गये हो, आज सुनाओ मुरली तान
    वृंदावन की कुंज गली में, गोप - गोपियों की मुस्कान।

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    1. सादर चरण बन्दन दीदी

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  8. भई वाह क्या बात है

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  9. भई वाह क्या बात है

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  10. वाह्ह्ह् बहुत खूब भइया जी

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  11. लाजवाब भुजंग प्रयात।

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  12. भुजंग प्रयात छंद मा शानदार चित्रण,भैया ।बधाई अउ शुभकामना।

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