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Thursday, July 9, 2026

पंडवानी गौरव: पद्मविभूषण डॉ. तीजन बाई

 पंडवानी गौरव: पद्मविभूषण डॉ. तीजन बाई 


आल्हा छन्द- *श्रद्धांजलि सुमन*


तीजन बाई जनम धरे जी, जिला दुर्ग गनियारी गाँव।

सुना महाभारत के गाथा, दया-मया के पाइस छाँव।।


तेरह बछर उमरिया मा ही, पहिली बेर मंच मा आय।

धरे पंडवानी के बाना, लिये तमूरा हाथ बजाय।।


बइठे-बइठे गांय सबो ता, तीजन ठाढ़े सुर ला तान।

कभू धनुष ता कभू गदा के, लिये तमूरा बाना जान।।


कड़क अवाज सुनावत जग ला, दुस्सासन के छाती चीर।

करिस परख हीरा के संगी, गुरु तनवीर गुनी गंभीर।।


देश-विदेश म डंका बाजिस, सत्रह देश करे परनाम।

पद्मश्री अऊ पद्मविभूषण, दुनिया जानय तीजन नाम।।


पाँच जुलाई एम्स रायपुर, मा तीजन के छूटिस प्रान।

छत्तीसगढ़ के कंठ सिरागे, रोवत हावय आज जहान।।


लोक कला के सुरुज भुतागे, आँखी मा हे आँसू आय।

अमर रही तीजन बाई हा, जुग-जुग तोर सुजस जग गाय।।


✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 05/07/2026

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