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Thursday, July 9, 2026

कसके बने दमोर

 सरसी - छंद 

विधान – 16 - 11 

डाड़ – 2 / चरण चार


कसके बने दमोर


सब ला तोरे हवय सहारा, धुर्रा उड़गे खोर । 

तरिया नदिया घलो सुखागे, सुक्खा परगे बोर ।।

लगगे अब चौमासा भगवन, अब तो पानी झोर । 

नाँगर बइला घलो निकलही, कसके बने दमोर ॥


गरमी ले अब प्रान छुट्त हे, लाइन होथे गोल । 

आँधी अंधड़ चलथे भारी, टूटत हावय पोल ॥ 

गिर जा पानी झन तरसा तैं, जादा नइ तो थोर । 

नाँगर बइला घलो निकलही,  कसके बने दमोर ।।


तीपत लकलक चारों कोती, देखव आके हाल । 

सब के मालिक एक तहीं हस, भर दे नदिया ताल।।  

तरतर-तरतर चुहत पसीना, चट चट जरथे खोर । 

नाँगर बइला घलो निकलही,  कसके बने दमोर ।।


कमलेश प्रसाद शर्माबाबू 

 कटंगी-गंडई जिला केसीजी छत्तीसगढ़

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