गीत
मात्रा--16--14
विषय-- आवव अइसन गीत लिखन
मन मानस के द्वार खोल दे,
आवव अइसन गीत लिखन।
जेला सुनके हिरदे झूमय,
दया मया संगीत लिखन। ।
जिनगी मा संघर्ष भरे अब,
कइसे अजब जमाना हे ।
आज इहाँ अउ काली ऊँहाँ,
ककरो नहीं ठिकाना हे।।
उरभट रद्दा पाट-पाट के,
ये भुइँया बर प्रीत लिखन।
मन मानस के द्वार खोल दे।
आवव अइसन गीत लिखन। ।
भेद-भाव मा भरगे दुनिया,
बिन सुर राग अलापत हे।
अपने धुन मा मस्त हवय सब,
देखत बड़ा बियापत हे। ।
रहय धरोहर हिरदे भीतर,
हर मनखे मन मीत लिखन।
मन मानस के द्वार खोल दे,
आवव अइसन गीत लिखन। ।
मनखे-मनखे एक बरोबर,
संदेश हवय भुइँया के।
दया धरम अउ मीत मितानी,
पहिचान हवय गुइँया के। ।
पबरित होवय सबके अंतस,
ज्ञान भरे सब रीत लिखन।
मन मानस के द्वार खोल दे,
आवव अइसन गीत लिखन।
सुमित्रा शिशिर
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