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Thursday, July 9, 2026

बरखा

 ‎‎‎आजा बरखा रानी* (चौपाई छंद)

‎आजा-आजा बरखा रानी।

‎इहाँ गिरादे झटकुन पानी।।

‎सुरुज देव आगी फेंकत हे।

‎हरर हरर सब ला सेंकत हे।।

‎घाम जनावत हावय भारी।

‎लू मा उपजत हे बीमारी।।

‎तरिया नदिया सबो अँटागे।

‎कुँआ बावली सबो सुखागे।।

‎सुख्खा के आगी तड़पावत।

‎हैंडपंप घलो लड़खड़ावत।।

‎टैंकर आगू नाच लगावत।  

‎पानी बर रोजे कल्लावत।।  

‎बोरवेल के मोटर हाँफय।

‎पानी बिन मशीन हा काँपय।।

‎नल-जल के पाइप रोवत हे।

‎पेड़ काट मनखे सोवत हे।।

‎छोड़व बरखा आना-कानी।

‎तरसत हावँय सबो परानी।।

‎दिखही कब ये बदरी कारी।

‎आही कब तोर इहाँ बारी।।

‎आजा कँसके मार झकोरा।

‎हावँय सब ला तोर अगोरा।।

‎फेर मया बरखा बरसादे।

‎कारी-कारी बदरी ला दे।।

‎टर्र मेचका राग सुनाही। 

‎खेती खार फेर हरियाही।।

‎तरिया नदिया उफान मारे।  

‎दाई आँखी अँसुवन ढारे।।

‎रचनाकार-हेमलाल साहू

‎गाँव - गिधवा, जिला - बेमेतरा 

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