*गणात्मक दोहा*
18/06/2026
*यगण (122)- *(सृजन शब्द-- नवेली)* 4 बार
नार नवेली रात के, चले सहेली संग।
हँसी ठिठोली गोठ मा, बहुत बिखेरे रंग।।
*मगण (222)-*
घर चौबारा देख लव, कर पैबारा गोठ।
ये दूराहा प्रेम ला, आजादी दे पोठ।।
*तगण (221)-*
दुखिया ला तत्काल ही, मिलै नहीं आधार।
दुश्मन ये संसार मा, झूठ भरे बाजार।।
*रगण (212)-*
छंद के छ हे गीतिका, मिलै रीतिका ज्ञान।
उज्जर मन मा शोभते, करै साधिका ध्यान।।
*जगण (121)-*
देखव मया दुकान मा, का गरीब के मोल।
देशी सबो समान हे, हमला कहय अमोल।।
सुमित्रा शिशिर
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