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Thursday, July 9, 2026

गणात्मक दोहा*

 *गणात्मक दोहा*

18/06/2026



*यगण (122)- *(सृजन शब्द-- नवेली)* 4 बार

नार नवेली रात के, चले सहेली संग।

हँसी ठिठोली गोठ मा, बहुत बिखेरे रंग।।


*मगण (222)-*

घर चौबारा देख लव, कर  पैबारा गोठ।

ये दूराहा प्रेम ला, आजादी दे पोठ।।


*तगण (221)-*

दुखिया ला तत्काल ही, मिलै नहीं आधार।

दुश्मन ये संसार मा, झूठ भरे बाजार।।


*रगण (212)-*

छंद के छ हे गीतिका, मिलै रीतिका ज्ञान।

उज्जर मन मा शोभते, करै साधिका ध्यान।।


*जगण (121)-*

देखव मया दुकान मा, का गरीब के मोल।

देशी सबो समान हे, हमला कहय अमोल।।


सुमित्रा शिशिर

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