21 जून अंतरास्ट्रीय योग दिवस पर......
रोला छंद- *योग*
योग करव सब लोग, योग ले मन हरसाथे।
दूर भगय सब रोग, देह सुग्घर खिल जाथे।।
मन मा भरत उमंग, शक्ति के स्रोत जगाथे।
रहिथे स्वस्थ शरीर, कष्ट तुरते दुरिहाथे।।
चिंता मिटय तमाम, योग मा जब मन लागे।
नइ भटकय जी ध्यान, चेतना भीतर जागे।।
प्राणायाम अनूप, श्वास के गति ला साधे।
मिटे सकल संताप, कभू नइ रोग बियाधे।।
इक्किस जून महान, दिवस ये मंगलकारी।
गूँजत हे सब ओर, योग के महिमा न्यारी।।
नमन करय सब देश, ज्ञान भारत हा पाये।
काया रखे निरोग, मंत्र सब हें अपनाये।।
आवव मिलके आज, प्रतिज्ञा मन मा धारिन।
करबो निशदिन योग, प्रदूषण मन के मारिन।।
स्वस्थ बनय ये देश, इही हे असली पूजा।
योग सरीखे मीत, न जग मा कोई दूजा।।
सिर्फ क्रिया ना योग, कर्म के सीख सिखाथे।
समता के ये भाव, सरी दुनिया मा लाथे।।
योग करे ले लोग, बरस सौ ऊपर जीथें।
गजानंद आनंद, धरे सुख रस ला पीथें।।
✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़)21/06/2026
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