Tuesday, April 24, 2018

विधान - कज्जल छन्द

कज्जल छन्द   (14-14)

14/14 मात्रा के 4 चरण वाले समपाद मात्रिक छन्द आय.

हर चरण के आखिरी मा गुरु, लघु अनिवार्य

उदाहरण -

समय रहत ले अरे चेत (कज्जल छन्द)

रुखराई ला  काट काट
नदिया नरवा पाट पाट
नँगत बनाये नगर हाट
जंगल मन हो गिन सपाट।।

सहर लील गिन हमर खेत
लाँघन हन लइका समेत
सपना मन बन गिन परेत
समय रहत ले अरे चेत ।।

चेताइस केदार नाथ
भुइयाँ के झन छोड़ साथ
नइ तो हो जाबे अनाथ  
कुछू नहीं हे तोर हाथ ।।

जेला कहिथस तँय विकास
वो तो भाई हे बिनास
समझावय धरती अगास
भुइयाँ ला झन कर हतास ।।

हरियर कर दे खेत-खार
जंगल के कर दे सिंगार
रोवय झन नदिया पहार
पीढ़ी-पीढ़ी ला उबार ।।

प्रस्तुतकर्ता -  अरुण कुमार निगम
आदित्य नगर, दुर्ग छत्तीसगढ़

8 comments:

  1. विधान सहित कज्जल छंद मा अनुपम अउ अनुकरणीय रचना ,गुरुदेव। सादर नमन।

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  2. बहुते सुन्दर कज्जल छंद गुरुदेव।संग ये छंद विधान के अनमोल ज्ञान।

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  3. बहुते सुघ्घर कज्जल छंद हे गुरुदेव

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  4. छंद खजाना के कोठी भरत हे गुरुवर।
    सादर आभार
    अनमोल ज्ञान मिलत हे हम सब ला।

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  5. अनुकरणीय रचना गुरुदेव जी

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  6. अनुकरणीय रचना गुरुदेव जी

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  7. बहुँत सुग्घर रचना गुरुदेव।स्वारथ म आके मनखे मन बड़ गलती करत हे।आप के रचना मा चिंता वाजिब हे।

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  8. वाह वाह गुरुदेव गजब सुघ्घर,,सादर पायलागी

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