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Thursday, March 12, 2020

शंकर छंद - केवरा यदु"मीरा"



शंकर छंद - केवरा यदु"मीरा"

बृन्दाबन मा होरी खेलत, देख नँद के लाल।
भर पिचकारी मारत हावे,करत हे बेहाल।।
बाजा बाजे ढोल नँगारा,नाचत देय ताल।
देखो ब्रज के नर अउ नारी,दिखय लाली गाल।।

आइस हे जब राधा गोरी, छेंक मोहन राह।
डारन लागिस रंग घोरके,धरे राहय बाँह।।
बरजोरी झन कर गिरधारी,मिलय गारी आज।
सबो सखी सुन हाँसन लागे,नइये श्याम लाज।।

रँग हे हरियर पिँवरा लाली, रंग अउ हे श्याम ।
कोन रंग ला डारँव मँय हा, झिन करो बदनाम।।
श्याम रंग हा मोरो मन भाथे,नहीं कोनो भाय।
कतको मोला तँय तड़पाथस, तोर संग  सुहाय।।

छंदकारा - केवरा यदु "मीरा "
राजिम(छत्तीसगढ़)

4 comments:

  1. बहुत सुंदर प्रस्तुति बहुत बधाई

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  2. बहुत सुंदर शंकर छंद दीदी जी...💐💐💐💐

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  3. बहुत बढ़िया केवरा बहिनी। बधाई हो।

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