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Sunday, March 15, 2020

बिष्णु पद छंद छंदकारा-सुधा शर्मा

बिष्णु पद छंद

छंदकारा-सुधा शर्मा

1- सुन ले भगवान मोर बिनती,तोर शरण म पड़े।
हाथ जोर के ठाढ़े हाँवव,विपदा विकट खड़े।

2-धरती दाई तीपत कोरा,कुटी कुटी बँटगे।
होवत संगी देखव पीरा,जीव जन्तु घटगे।

3-जंगल झाड़ी सबो उजरगे,नँदिया प्यास मरे।
कइसन बेरा आगे देखव,जिनगी भँवर पड़े।

4-चेतव गा सब मनखे अब तो,उदिम कुछू करहू।
अभी घलव नइ चेतिहव ग तब,जीते जी मरहू।

5-जात पाँत के होवत झगरा,मया पीरा बिसरे।
बात बात म लहू बोहावँय,मनखे कहाँ अमरे।

6- मर मर किसान करे किसानी,
मिहनत मोल कहाँ।
झूलत हावे फाँसी भगवन,मुक्ति पाये जहाँ।

7-नँदिया तरिया सुख्खा होवत,पानी मोल बिके
ढोलक कस बढ़ोतरी बाजे,भीतर पोल दिखे।

8- गौ माता रोवत हावे अब, नैना नीर बहे।
मनखे इहाँ निर्दयी होगे,गौधन रोज कटे।

9-कतका पीरा गोठियांव मँय,बाढ़त पाप हरे।
किरा असन हे जिनगी जीयत,मनखे शाप धरे।

10- नवा नवा ये जुग के संस्कृति, मनखे सब बिगड़े।
लोक मरजाद बूड़त भगवन,कइसे भँवर खड़े।

सुधा शर्मा
राजिम छत्तीसगढ़

1 comment:

  1. बहुत सुग्घर दीदी जी बधाई हो

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