Sunday, February 4, 2018

लावणी छ्न्द - श्री अजय "अमृतांशु"

रक्तदान -

रक्तदान करके संगी हो ककरो प्राण बचावव जी।
दान हवय ये सबले बढ़ के,सब ला बात बतावव जी।

रक्तदान ईश्वर के पूजा,बात सबो झन जानव गा।
येहू आय भक्ति के रद्दा,बात तुमन ये मानव गा।

पइसा मा जब खून मिलय ना,उही बेरा चेत आथे।
जिनगी अधर म लटके रहिथे,तब ये बात समझ पाथे।

लहू नइ बनय लेब म संगी, कीमत येकर जानव जी।
येहा केवल देह मा बनथे,येला सब झिन मानव जी।

रक्तदान कमजोरी लाथे,ये भरम भूत झन पालव।
खून साफ होथे येकर ले,मन मा येला बइठालव।

नइ परय कभू दिल के दौरा, रक्तदान के गुण भारी।
स्थिर रहिथे बी पी लेबल,गुनव थोरिक संगवारी।

वजन घलो नइ बाढ़य संगी, मोटापा होथे जी कम।
मंत्र हवय ये स्वस्थ रहे के,रक्तदान मा काबर गम।

रचनाकार - श्री अजय "अमृतांशु"
भाटापारा, छत्तीसगढ़

39 comments:

  1. बहुत बढ़िया गुरूजी

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    1. धन्यवाद साहूजी

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    2. धन्यवाद साहूजी

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  2. रक्तदान बर प्रेरित करत बहुत बढ़िया लावणी छंद के रचना अजय जी ।

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  3. आभार चंद्राकर जी

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  4. आभार चंद्राकर जी

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  5. रक्त दान के नफा बतावत सुन्दर लावणी छंद

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  6. धन्यवाद मितान जी

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  7. धन्यवाद मितान जी

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  8. बहुत बढ़िया बधाई हो

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  9. बहुत बढ़िया बधाई हो

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  10. रक्तदान बर प्रेरित करत सुग्घर लावणी छंद ,भैया। बधाई अउ शुभकामनाएं।

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  11. वाहःहः अजय भाई बहुत सुघ्घर लावणी छंद
    बहुत बहुत बधाई।

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  12. बहुत सुघ्घर रचना भैया जी
    बहुत बहुत बधाई

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  13. वाह वाह भैया खूब

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    1. आभार जितेंद्र भैया

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    2. आभार जितेंद्र भैया

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  14. बहुत सुग्घर रचना सर।सादर बधाई

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  15. बहुत सुग्घर रचना सर।सादर बधाई

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  16. वाह्ह वाह्ह "अमृतांशु" सर।

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  17. सादर आभार सर जी

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  18. सादर आभार सर जी

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