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Wednesday, November 27, 2019

सार छंद : मथुरा प्रसाद वर्मा




सार छंद : मथुरा प्रसाद वर्मा

राधा बोलिस मोहन काली, होरी खेले आबे ।
रास रचाबे हमर गाँव मा,  रंग गुलाल उड़ाबे।


 रद्दा देखत खड़े रहूं रे, फ़रिया पहिरे सादा ।
आना परही तोला काली, कर ले पक्का वादा।


रसिया रे नइ जानस का, मोर गाँव  बरसाना ।
करिया कारी कालिंदी के, तिरेतिर चले आना।

हे ब्रज राजा मोरमुकुट हा,  तोरे माथा सोहे।
काने के कुंडल हा तोरे, मन ला मोरे मोहे।


फेर  बँसी ला तँय झन लाबे, मोला अबड़  सताथे ।
सुन बसरी के धुन ला कान्हा, सब गोपी मन आथे।


बनमाला ला पहिर महुँ हा, करहुँ तोर अगुवानी।
तोरे सँग मा कइहीं मोला, सबझन राधा रानी ।

 मनमोहन हा बोलिस राधा, जब जब सुरता करबे।
तोर मया मा बँधाए आहूँ, धीरज थोरिक धर ले।

गोरी मोरे रंग रंग के, लाल लाल हो जाबे।
मँय हा तोरे राधा बनहूँ , कृष्णा तहूँ कहाबे।

मथुरा प्रसाद वर्मा
ग्राम कोलिहा, बलौदाबाजार
8889710210

11 comments:

  1. बहुते सुग्घर सर,बहुत-बहुत बधाई

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  2. होरी के सुंदर चित्रण,बधाई

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  3. बहुत बढ़िया सार छंद।हार्दिक बधाई

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  4. वाहहहहह सुग्घर रचना

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  5. अति सुन्दर सर जी

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  6. वाह्ह अब्बड़ सुग्घर रचना भइया बधाई 🙏🙏

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  7. बहुत बढ़िया सृजन हे भाई

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  8. अति सुन्दर रचना सर

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  9. अति सुन्दर रचना सर

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  10. अनंत बधाई भाई👏👌💐💐
    राधा मोहन के सुग्घर बरनन👏👏👍💐

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